राजस्थान की जेल में बंद एक पाकिस्तानी कैदी ने अपने वतन जाने के लिए गांधीगिरी शुरू कर दी है। अलवर केंद्रीय कारागार में बंद ये कैदी अपनी सजा काट चुका है और वतन वापसी चाहता है। इसे लेकर ही इसने दो दिन से भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
कारागार प्रशासन ने अलवर केंद्रीय कारागार में अपनी तय सजा काटने के बाद भी बंद विभिन्न देशों के डेढ़ दर्जन कैदियों की वतन वापसी की व्यवस्था करवाने के संबंध में अलवर एसपी को पत्र लिखा है। ये सभी कैदी अपने वतन लौटना चाहते हैं और कभी भी साजिद के साथ भूख हड़ताल पर उतर सकते हैं।
कई तो सालों पहले अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। कागजात की ही कमी इन सभी को अपने देश वापस जाने से रोक रही है। सजा पूरी करने के बाद जैसे ही इन्हें छोड़ा जाता है, तो इन्हें वैध वीजा के अभाव में फिर पकड़ लिया जाएगा।
पाकिस्तान निवासी 45 वर्षीय साजिद सात महीने पहले अपनी साज पूरी कर चुका है, लेकिन वह अब भी अलवर केन्द्रीय कारागार में बंद है। साजिद पर पाकिस्तान से अवैध रूप से सीमा पार कर भारत आने का आरोप है।
साजिद की मांग है कि उसे सुरक्षित अपने वतन वापस भेज दिया जाए। सजिद जयपुर केन्द्रीय कारागार में रहते अपनी सजा 21 मई 2016 को पूरी काट चुका है। इसके बाद उसे अलवर केंद्रीय कारागार में भेजा गया। उसकी मांग है कि उसे पाकिस्तान भेजने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जाएं। इस जेल से बाहर निकलकर वतन वापसी का इंतजार केवल साजिद को ही नहीं है। यहां कई देशों के कैदी सजा काटने के बाद भी बंद हैं।
अलवर केंद्रीय कारागार में 6 देशों के 17 कैदी हैं, जो अपनी पूरी सजा काटने के बाद भी यहां बंद हैं। जेल प्रशासन ने अलवर एसपी राहुल प्रकाश को पत्र में लिखकर कहा है कि इन कैदियों की वतन वापसी की तुरंत उचित व्यवस्थाएं होनी चाहिए। पत्र में बताया गया है कि सभी कैदी साजिद के साथ भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दे रहे हैं।
यहां कैमरून के सरगेलेन बेटेग भी बंद है, जिसे नकली करेंसी इधर-उधर करने के आरोप में पकड़ा था। ये भी अपनी सजा कुछ महीने पहले पूरी कर चुका है। इसी तरह पाकिस्तान के ही जावेद असलम को मार्च 2012 और बलूचिस्तान के हमीद खान अगस्त 2011 से अपने वतन लौटने का इंतजार है।