नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राजस्थान सरकार की भूजल विनियमन गाइडलाइन रद्द कर दी। NGT ने कहा कि ये नियम CGWA के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं थे। ट्रिब्यूनल ने भूजल दोहन को गंभीर पर्यावरणीय चिंता बताया।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल ज़ोन बेंच, भोपाल ने राजस्थान सरकार की भूजल विनियमन संबंधी गाइडलाइन को रद्द कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने “ताहिर हुसैन बनाम राजस्थान सरकार एवं अन्य” मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा 5 और 10 फरवरी 2025 को जारी दिशा-निर्देशों को निरस्त कर दिया। मामले की सुनवाई न्यायिक सदस्य जस्टिस शियो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की खंडपीठ ने की।
NGT ने अपने आदेश में कहा कि भूजल का लगातार घटता स्तर देश के लिए गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बन चुका है। अवैध भूजल दोहन पर्यावरण कानून के तहत दंडनीय अपराध है और राज्य सरकारें CGWA द्वारा बनाए गए सुरक्षा मानकों को कमजोर नहीं कर सकतीं।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने ट्रिब्यूनल को बताया कि राजस्थान सरकार ने विवादित गाइडलाइन जारी करने से पहले CGWA से कोई परामर्श नहीं किया और न ही उसकी स्वीकृति ली।
ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि राजस्थान सरकार ने खुद इन विवादित अधिसूचनाओं को वापस लेने की जानकारी दी थी। इसके बाद NGT ने अपील स्वीकार करते हुए राजस्थान सरकार की भूजल विनियमन गाइडलाइन को रद्द कर दिया।