नवरात्रि का उत्सव 28 मार्च को शुरू होगा। इस बार नवरात्रि के पर्व में भी देश की राजनीति की तरह विकास की बयार बहेगी। पढ़ने में अजीब लगने वाली यह बात सही है। दरअसल इस बार नवरात्रि की शुरुआत में मां दुर्गा का वाहन अश्व होगा। अश्व होने का सीधा सा अर्थ यही है कि अश्व की सवारी के साथ ही विकास की रफ्तार बढ़ेगी। ज्योतिशी इसे देश और आम लोगों के लिए शुभ संकेत माना रहे हैं।
एक और खास बात की मानें तो इन बार नवरात्रि नौ की बजाय आठ दिन की होंगे। इसमें 28 मार्च को अमावस्या की तिथि सुबह 8.27 बजे तक ही रहेगी। घट स्थापना सुबह 08.27 के बाद सर्वार्थ सिद्धियोग में 01 बजकर 41 मिनिट कर सकते है । शास्त्रों में प्रातः काल के बाद देवी आवाहन और घट स्थापना का मुहूर्त का सर्व श्रेष्ठ समय अभिजीत का बताया है । इस दौरान सभी देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना के साथ ही मनोकामना दीपों से मंदिर जगमग होंगे। श्रद्घालु व्रत उपवास कर अपनी आस्था व्यक्त करेंगे और कन्या पूजन होगा।
जहां तक बात माता की सवारी की है, वो घोड़ा होने से सरकार के कामों को गति तो मिलेगी ही, पर इसके साथ ही विरोध भी होंगे। माना जाता है कि माता का हाथी पर सवार होकर जाना शासक एवं प्रजा वर्ग दोनों के लिए शुभ माना जाता है। गजवाहन होने से अच्छी वर्षा के योग है जिससे धन धान्य में वृद्धि होंगी और लोग खुशहाल होने के साथ साथ राष्ट्र विकास की ओर अग्रसर होंगे । इस नवरात्रि की प्रतिपदा का क्षय है, जिससे एक नवरात्र कम हो गया। वहीं 5 अप्रैल को रामनवमी के साथ इसका समापन होगा।
पं. राजकुमार चतुर्वेदी के अनुसार पिछले दो सालों से चैत्र नवरात्रि 8 दिनों की पड़ रही है। वर्ष 2015 में 21 से 28 मार्च तक और 2016 में 8 से 15 अप्रैल तक 8 दिनों की नवरात्रि थी। इस वर्ष भी एक तिथि के क्षय होने की वजह से एक बार फिर 8 दिनों की नवरात्रि रहेगी।
नवरात्रि के दिनों में विशेष योगों का संयोग
28 मार्च सर्वार्थ सिद्धियोग सूर्योदय से 01 बजकर 41 मिनिट
30 मार्च सर्वार्थ सिद्धियोग सूर्योदय से 09 बजकर 24 मिनिट
31 मार्च रवि योग
1 अप्रैल को अमृत योग सर्वार्थ सिद्धियोग सूर्योदय से रात 02.54 तक
2 अप्रैल द्वि पुष्कर व् राजयोग दोपहर 03.16 से रात 01.14 तक
4 अप्रैल रवियोग रात 11 बजकर 15 मिनिट से
5 अप्रैल रवियोग संपूर्ण दिन रात