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राजस्थान: नागौर में फसल बीमा फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा, जेल में बंद सात आरोपी प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार

Wed, 30 Sep 2026 02:25 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर

सार

नागौर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने अलग-अलग मामलों में जेल में बंद सात आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। आरोप है कि किसानों की जमीन और खसरा नंबरों का दुरुपयोग कर फर्जी बीमा कराया गया
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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नागौर जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने अ जांच को तेज कर दिया है। पुलिस ने अलग-अलग मामलों में जेल में बंद सात आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर किसानों की जमीन और उनके खसरा नंबरों का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से बीमा कराने और क्लेम की लाखों रुपये की राशि दूसरे बैंक खातों में उठाने का गंभीर आरोप है।
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नागौर पुलिस अब इन आरोपियों को जेल से लाकर सघन पूछताछ कर रही है, ताकि फर्जीवाड़े के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। नागौर जिले के अलग-अलग पुलिस थानों में अब तक इस फर्जीवाड़े से जुड़ी 37 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अब तक कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

सात आरोपी प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, पहले से दर्ज मामलों की जांच के दौरान इन सात आरोपियों की आपराधिक भूमिका सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने अदालत के माध्यम से इन्हें जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में सियाराम लोयल, ताराराम लोयल, अक्षय कुमार, सुबेदार, विनीत कुमार दुबे और आदित्य पाटोदिया शामिल हैं। पुलिस की टीम इन सभी आरोपियों को अलग-अलग मामलों में जेल से लाकर पूछताछ कर रही है। पूछताछ के दौरान पुलिस फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह, बीमा पॉलिसी जारी करने की प्रक्रिया और क्लेम की रकम के लेनदेन से जुड़ी तमाम कड़ियों को गहराई से खंगाल रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि फर्जी कागजात तैयार करने से लेकर बीमा कराने और क्लेम की रकम को दूसरे खातों में हस्तांतरित करने में कौन-कौन से अन्य लोग शामिल थे।
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किसान की शिकायत से खुला पूरा फर्जीवाड़ा
फसल बीमा के इस बड़े खेल का खुलासा उस समय हुआ जब माडपुरा निवासी एक पीड़ित किसान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। किसान ने अपनी शिकायत में बताया कि उसकी जानकारी और सहमति के बिना ही उसकी खेत की जमीन पर किसी अन्य व्यक्ति ने फसल बीमा करवा लिया है।

पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया कि आरोपियों ने किसान के खेत के खसरा नंबरों का अवैध रूप से इस्तेमाल किया। इसके बाद किसी अन्य अज्ञात व्यक्ति को कागजों में बंटाईदार दर्शाते हुए कूट रचित और फर्जी दस्तावेज तैयार कर लिए गए। इन्हीं फर्जी दस्तावेज के आधार पर फसल का बीमा कराया गया और बाद में क्लेम की राशि किसी दूसरे बैंक खाते में जमा कराकर उठा ली गई। पुलिस जांच में अकेले मामले में ही करीब 3,47,773 रुपये की बीमा क्लेम राशि फर्जी तरीके से उठाने की बात सामने आई है।

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बीमा कर्मचारियों की भूमिका की जांच
पुलिस की जांच में बीमा कंपनी से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी अब सीधे तौर पर जांच के दायरे में आ गई है। आरोपियों ने कथित तौर पर बीमा कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत से वास्तविक किसानों के नाम, उनके खसरा नंबर और जमीन से संबंधित संवेदनशील जानकारियां जुटाई थीं। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार करके बीमा कराया गया।
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जांच अधिकारी सुरेश कुमार कस्वा ने बताया कि जिले में दर्ज 37 मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। यह दल फर्जी बंटाईदार दस्तावेज, बीमा पॉलिसियों और क्लेम की रकम के बीच के सभी संपर्कों की जांच कर रहा है। शुरुआती मामलों में एक शिकायत से जुड़े 4.70 लाख रुपये से अधिक के फर्जी क्लेम का मामला भी सामने आया था। पुलिस को आशंका है कि इस जांच के आगे बढ़ने पर करोड़ों रुपये के फर्जी क्लेम का पर्दाफाश हो सकता है।
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