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Nagaur: कब्र से निकाला नाबालिग मनीषा का शव, दोबारा पोस्टमार्टम से उठे सवाल; सर्दी-जुखाम के इलाज में गई थी जान

Sat, 25 Oct 2025 08:30 PM IST
नागौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर

सार

Nagaur News: नागौर जिले में कथित फर्जी डॉक्टर की लापरवाही से 14 वर्षीय मनीषा की मौत हो गई। परिजनों के विरोध पर कब्र से शव निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम हुआ। डॉक्टर फरार है, जांच जारी है। यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
 
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मृतका मनीषा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दीपावली के दिन नागौर जिले के पांचोड़ी कस्बे में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। 14 साल की मासूम मनीषा की मौत एक कथित फर्जी डॉक्टर की लापरवाही के कारण हो गई। परिजनों के विरोध के बाद प्रशासन को कब्र से शव निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम कराना पड़ा।

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सर्दी-जुखाम के इलाज में गई थी मासूम की जान
मनीषा को बीमार महसूस होने पर परिजन उसे स्थानीय महादेव हॉस्पिटल लेकर गए। अस्पताल में कार्यरत कथित डॉक्टर रामलाल खोजा ने बच्ची को ड्रिप और इंजेक्शन लगाया। कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ने लगी और आंखों की रोशनी चली गई। डॉक्टर ने तुरंत उसे नागौर रेफर कर दिया, लेकिन वहां पहुंचते ही मनीषा को मृत घोषित कर दिया गया। दीपावली के दिन हुए इस हादसे से परिजनों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा।
 
डॉक्टर फरार, समाज में आक्रोश
परिजनों ने जब मनीषा का शव घर लाकर डॉक्टर रामलाल खोजा को बुलाया, तो वह क्लिनिक बंद कर फरार हो गया। मजबूर होकर परिजनों ने बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। अगले दिन गांव के लोग और मनीषा के परिजन खींवसर SDM कार्यालय पहुंचे और अस्पताल सील करने तथा फर्जी डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए SDM ने शव को कब्र से निकालने और दोबारा पोस्टमार्टम के आदेश दिए।
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मेडिकल बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम, पुलिस जांच जारी
प्रशासन ने खींवसर जिला अस्पताल की मोर्चरी में मेडिकल बोर्ड गठित कर पोस्टमार्टम करवाया। पुलिस थानाधिकारी श्याम सुंदर ने बताया कि SDM के आदेश पर मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया है। डॉक्टर रामलाल खोजा के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है, जांच जारी है। पुलिस ने लापरवाही और फर्जी इलाज के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया है। अगर डॉक्टर की डिग्री फर्जी पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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फर्जी डॉक्टरों पर लगाम कब?
यह घटना राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के गृह क्षेत्र में हुई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना डिग्री वाले झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला है, जो गरीब और अनजान परिवारों के लिए खतरा बन चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन समय-समय पर जांच की बातें करता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है।

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