कांसे के बर्तन का एक सेट, यह करीब चार हजार रुपयें में मिलता है।
- फोटो : सोशल मीडिया
इन देशों में बड़ी मांग
करीब एक साल से अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, लंदन, कनाडा, आस्ट्रेलिया, और दुबई में काफी डिमांड आने लगी है। कांसे के बर्तनों के सेट की मांग में करीब 15 फीसदी तक का उछाल आया है। वहां के बड़े-बड़े होटलों में इन बर्तनों का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है। इसी तरह देश के बड़े होटल भी इन बर्तनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे नागौर का कांसा उद्योग को काफी फायदा मिल रहा है।
पहले सिर्फ बर्तन बनते थे और अब बन रहा डिनर सेट
शहर के कंसारा समाज के लोग कई पीढ़ियों से कांसे के बर्तन बनाने का काम करते आ रहे हैं। पहले यह सिर्फ बर्तन बनाते थे, लेकिन धीरे-धीरे कांसे के डिनर सेट की मांग बढ़ने लगी इसके बाद अलग-अलग तरह के सेट बनाए जाने लगे। अब यहां के बर्तन और डिनर सेट देश के कई राज्यों और विदेशों में सप्लाई हो रहे हैं।
इन बर्तनों का इस्तेमाल करने के कई फायदे हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
प्राचीन काल में भी किए जाते थे इस्तेमाल
कांसे के बर्तन प्राचीन काल से ही उपयोग में लाए जा रहे हैं। ईरान, सुमेर, मिस्र तथा हड़प्पा, मोहन जोदड़ो, लोथल समेत कई प्राचीन सभ्यताओं से इसका उल्लेख मिलता है। उस समय यह बर्तन हाथ से बनाए जाते हैं। नागौर में भी कई साल पहले तक इन्हें हाथ से ही बनाया जाता रहा, लेकिन अब इन्हें मशीन से बनाया जा रहा है।
कांसे के बर्तन उपयोग में लाने के फायदे
चिकित्सकों मानना है कि कांसे के बर्तनों में भोजन करना शरीर के लिए काफी लाभदायक है। कांसा एक मिश्र धातु है, यह तांबा और वांगा को मिलाकर बनाया जाता है। कांसे के बर्तन उपयोग में लाने से रक्त, त्वचा रोगों और कब्ज से बचाव होता है। इससे चर्म रोग, कृमि रोग और नेत्र रोगों में भी फायदेमंद होता है।