रक्षा बंधन भाई-बहन के प्यार का प्रतीक होता है। राजस्थान के डूंगरपुर में इस पर्व को खास बनाने के लिए निराश्रित बच्चों ने वेस्टेज मटेरियल का इस्तेमाल कर 75 फीट परिधि की राखी का निर्माण किया है।
रक्षा बंधन भाई-बहन के प्यार का प्रतीक होता है। राजस्थान के डूंगरपुर में इस पर्व को खास बनाने के लिए निराश्रित बच्चों ने वेस्टेज मटेरियल का इस्तेमाल कर 75 फीट परिधि की राखी का निर्माण किया है। जिला मुख्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी हॉल में 200 निराश्रित बच्चों ने यह कीर्तिमान छह घंटे में पूरा किया है। सभी बच्चे सरकार द्वारा अनुदानित मुस्कान संस्थान में पल और पढ़ाई कर रहे हैं।
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वेस्टेज मटेरियल से बनाई राखियां
मुस्कान संस्थान के संचालक भरत नागदा ने बताया कि रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाले सामान से भी वेस्टेज निकलती है। जिनमें डिस्पोजल बोतलें, पुरानी सीडी, कागज, गत्तों,पॉलीथिनआदि शामिल है। उन्होंने बताया कि इन्हीं वेस्टेज मटेरियल का उपयोग कर निराश्रित बच्चों ने 75 फीट परिधि की 200 किलो वजन वाली राखी तैयार की है। इसमें एक हजार पुरानी सीडी, 1 हजार प्लास्टिक की डिस्पोजेबल बोतले, साड़ियां, 6 बांस, चिप्स के खाली रैपर्स आदि सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
पर्यावरण संरक्षण का भी दिया संदेश
राखी का निर्माण कर बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया है। नागदा ने बताया कि रोजमर्रा के जीवन में काफी चीजें ऐसी निकलती है, लेकिन ये उपयोगी भी साबित होती है। उन्होंने कहा कि बच्चों ने वेस्टेज से राखी का निर्माण कर आम लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं फेंकने का भी संदेश दिया है। उन्होंने निराश्रित बच्चों द्वारा बनाई गई राखी को विश्व की सबसे बड़ी होने का दावा किया है।