टोंक जिले में एक ऐसी घटना सामने आई जो सवाल खड़ा करती है कि बेटियां आखिर कहां सुरक्षित हैं। टोंक जिले के कोटड़ी मोड़ पर एक मां ने अपनी 11 साल की बेटी को साढ़े छह लाख रूपये में बेच दिया। मां ने बेटी को बेचने का स्टांप पेपर भी तैयार करवाया।
मानव तस्करी विरोधी ईकाई ने इस मामले में बिचौलिये और मां समेत तीन आरोपियों को पकड़ लिया है। इनमें आरोपी ताराचंद, संतरा देवी और बच्ची की मां राजरानी शामिल है। ताराचन्द और सन्तरा देवी को मजिस्ट्रेट ने 28 जनवरी तक रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस ने वह स्टांप पेपर जब्त कर लिये हैं।
पुलिस ने बताया कि टिकट लगे 10 रूपये के स्टांप पेपर पर लिखा है कि झालावाड़ निवासी बालिका की मां राजरानी ने उसका साढ़े छह लाख रूपये में सौदा किया था। सौदे के तहत दो लाख रूपये नकद दिये थे, जबकि बाकी रकम दो किश्तों में दी जानी थी। इन किश्तों से पहले ही लड़की पुलिस को मिल गई। बालिका बुधवार को सोंप कंजर बस्ती में आरोपितों के चंगुल से निकलकर छिपते-छिपाते कोटड़ी मोड़ पहुंच गई थी। वहां ग्रामीणों ने उसे पुलिस को सौंप दिया।
वहीं बीबीसी में प्रकाशित खबर के अनुसार आरोपी मां का कहना है कि पंचायत द्वारा लगाये गये साढ़े चार लाख रूपये के जुर्माने को भरने के लिये उसे पैसों की जरूरत थी। इसी के लिये उसने बेटी को बेचा। मां ने बताया कि उसने अपनी बेटी को सवाई माधोपुर में एक व्यक्ति के यहां 'नाते' में बैठा दिया था। 'नाता' राजस्थान में प्रचलित एक प्रथा है जिसमें पुरुष महिला के लिये कुछ पैसे देकर शादी कर लेता है। कुछ समय बाद ही आरोपी मां बेटी को सवाई माधोपुर से वापस घर ले आई। पंचायत ने इसे गलत मानते हुये जुर्माना लगा दिया।