दौसा पहुंचे भाजपा के सवाई माधोपुर से भाजपा विधायक डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश के उपराष्ट्रपति का पद एक संवैधानिक पद है। इस पर एक किसान का बेटा बैठा है, देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ देश के किसान के बेटे हैं, लेकिन इंडी अलायन्स के लोग उनका मजाक उड़ा रहे हैं। ये मजाक जगदीप धनकड़ का नहीं, देश के किसान और उपराष्ट्रपति का उपहास है। इसके लिए इंडिया अलायन्स और विशेषकर राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। आज जयपुर से दौसा आए भाजपा के सवाई माधोपुर से भाजपा विधायक डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने मीडिया से बात करते हुए ये बात कही।
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मर्यादा में रहकर विरोध करना जायज है, लेकिन जब उपराष्ट्रपति की मिमिक्री चल रही थी। उस वक्त खुद राहुल गांधी वहां खड़े होकर वीडियो बना रहे थे। उनका आचरण गिर गया है। वो मर्यादाहीन होकर देश के संवैधानिक पद उपराष्ट्रपति का मजाक उड़ाएं, ये देश बर्दास्त नहीं करेगा।
डॉ. मीना ने सांसदों का निलंबन उचित बताया
इस मौके पर सवाई माधोपुर विधायक डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा बोले कि चाहे लोअर हाउस हो या अपर हाउस हो, अगर वहां आचरण ठीक नहीं होगा तो सभापति और स्पीकर को आचरण हीन व्यक्ति को सदन से बाहर करने का अधिकार है। ऐसा अभी नहीं हुआ, इंदिरा गांधी के समय में तो बहुत सारे सांसदों को एक साथ बाहर निकाल दिया था। ये संसद की परंपरा है कि जो आचरण ठीक नहीं करता, उसे निलंबित कर दिया जाता है।
राजस्थान की सरकार का मंत्रिमंडल का गठन जल्द
डॉ. मीना ने संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में कहा कि यह एक चिंता का विषय है कि संसद की दर्शक दीर्घा में समाजकंटक घुस जाएं, चुनौती दे संसद की सुरक्षा को, उसकी जांच चल रही है, गिरफ्तारी भी हुई है। उन्हें कठोर सजा दिलाने के लिए सरकार सख्त है। साथ ही उन्होंने कहा कि राजस्थान में मंत्रिमंडल का गठन जल्दी ही दो-चार दिनों में ही होने वाला है। उन्होंने खुद के मंत्रिमंडल में जगह मिलने के सवाल पर कहा कि मैं सड़क छाप आदमी हूं। मंत्री पद मिलने के बाद भी सड़क पर ही बैठूंगा।
राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलने का सभी को हक है
बुधवार को दौसा सांसद जसकौर मीणा ने संसद में कहा था कि महिलाओं को संसद में बोलने का मौका नहीं दिया जाता है। उनके इस बयान को विधायक डॉक्टर मीणा ने गलत बताते हुए कहा कि उन्होंने ऐसा क्यों बोला पता नहीं, लेकिन उनको तो बोलने का सबसे ज्यादा मौका दिया गया है। वहीं, संसद में सभी को बोलने का मौका मिलता है, जो राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा प्रमुखता से उठाता है, वो महिला हो या पुरुष उसी को मौका दिया जाता है। यहां जेंडर के आधार पर किसी को मौका नहीं मिलता।