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जोधपुर अस्पताल में ब्लंडर: प्रसूता को चढ़ाया गलत ग्रुप का खून, किडनी ने छोड़ा साथ; लड़ रही जिंदगी की जंग

Sat, 18 Jul 2026 01:31 AM IST
राकेश कुमार पीटीआई, जोधपुर।

सार

जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में कथित तौर पर गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ाए जाने से एक प्रसूता की हालत गंभीर हो गई। महिला की किडनी प्रभावित होने के बाद उसका डायलिसिस किया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मरीज की पहचान में हुई चूक इस घटना की वजह बनी। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
 
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उम्मेद अस्पताल में लापरवाही - फोटो : @AI/अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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राजस्थान के जोधपुर स्थित उम्मेद अस्पताल में चिकित्सा लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल में एक 24 वर्षीय प्रसूता को गलती से गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया। इसके बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ गई। महिला की किडनी प्रभावित हो गई और उसे महात्मा गांधी (एमजी) अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसका इलाज जारी है।
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पीड़िता धापू भील जोधपुर जिले के दावड़ा बावड़ी गांव की रहने वाली है। उसने 11 जुलाई को एक बेटे को जन्म दिया था। प्रसव के बाद एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के कारण उसे उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में पहली बार उसे उसके ब्लड ग्रुप के अनुसार ओ-पॉजिटिव रक्त चढ़ाया गया था।

दूसरी बार रक्त चढ़ाने के दौरान हुई चूक
परिजनों का आरोप है कि 12 जुलाई की रात दूसरी बार रक्त चढ़ाते समय अस्पताल की ओर से गलती से बी-पॉजिटिव ब्लड चढ़ा दिया गया। खून चढ़ाने के कुछ ही देर बाद महिला को तेज कंपकंपी शुरू हो गई। उसके यूरिन बैग में खून आने लगा, जिसके बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
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इसके बाद महिला की किडनी ने काम करना बंद कर दिया। पेशाब आना रुक गया और शरीर में रक्तस्राव की समस्या भी शुरू हो गई। गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत महात्मा गांधी अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट किया गया।

अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह ने बताया कि गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ने से मरीज की किडनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। फिलहाल मरीज का डायलिसिस किया जा रहा है। उसकी स्थिति पहले से बेहतर है, लेकिन वह अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में आईसीयू में भर्ती है।

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कैसे हुई इतनी बड़ी गलती?
अस्पताल से जुड़ी शुरुआती जानकारी के अनुसार, वार्ड में एक जैसे नाम वाली दो महिलाएं भर्ती थीं। संयोग से दोनों के पतियों का नाम भी एक जैसा था। इसी वजह से पहचान में भ्रम हुआ और दूसरी महिला के लिए रखा गया बी-पॉजिटिव रक्त धापू भील को चढ़ा दिया गया। हालांकि, इस संबंध में जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
महिला के पति किशनाराम का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें यह नहीं बताया कि उनकी पत्नी को गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाया गया है। उनका कहना है कि अचानक तबीयत बिगड़ने की भी कोई स्पष्ट जानकारी परिवार को नहीं दी गई।
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जांच के आदेश
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी. एस. जोधा ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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