राजस्थान के बूंदी जिले में पंचायतों की कार्यप्रणाली, सफाई व्यवस्था और विकास कार्यों में सामने आई अनियमितताओं पर पंचायती राज एवं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। जिले के विभिन्न क्षेत्रों के निरीक्षण के बाद एक बीडीओ को निलंबित, दूसरे को एपीओ करने के साथ 11 ग्राम विकास अधिकारियों (वीडीओ) को भी निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।
ग्रामीणों की शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार मंत्री मदन दिलावर ने हाल ही में बूंदी जिले की पंचायत समिति केशवरायपाटन, तालेड़ा और हिंडोली क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान ग्रामीणों ने सफाई व्यवस्था, विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर अधिकारी अनुपस्थित मिले, जबकि स्वच्छता और विकास कार्यों में गंभीर खामियां भी सामने आईं। इसके बाद मंत्री ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई।
बीडीओ निलंबित, दूसरे को किया एपीओ
कार्रवाई के तहत केशवरायपाटन पंचायत समिति के विकास अधिकारी (बीडीओ) को निलंबित कर मुख्यालय जयपुर कर दिया गया है। वहीं तालेड़ा पंचायत समिति के विकास अधिकारी को एपीओ (आदेशों की प्रतीक्षा में) करते हुए पंचायती राज विभाग, जयपुर में पदस्थ किया गया है। इसके अलावा तीनों पंचायत समितियों के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
11 ग्राम विकास अधिकारी निलंबित
मंत्री के निर्देश पर 11 ग्राम विकास अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। साथ ही संबंधित ग्राम पंचायतों में पिछले तीन वर्षों के दौरान स्वच्छता और वित्त आयोग मद से हुए खर्च का पूरा विवरण सात दिन के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के कर्मचारियों पर भी कार्रवाई
कार्रवाई की जद में स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े अधिकारी भी आए हैं। तालेड़ा, केशवरायपाटन और हिंडोली के ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं जिला स्तर के स्वच्छ भारत मिशन समन्वयक के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इसके अलावा कुछ ग्राम पंचायतों के प्रशासकों को पदमुक्त किया गया है, जबकि कई अन्य पंचायत प्रशासकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
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निरीक्षण में सामने आई थीं गंभीर खामियां
9 मई को हुए निरीक्षण के दौरान कई पंचायतों में सफाई व्यवस्था बदहाल मिली थी। नालियां कचरे से भरी हुई थीं, सड़क किनारे गंदगी के ढेर लगे थे और स्वच्छता अभियान का असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा था।निरीक्षण में पौधारोपण अभियान की भी पोल खुल गई। रिकॉर्ड में हजारों पौधे लगाए जाने का दावा किया गया था, लेकिन मौके पर अधिकांश पौधे सूखे हुए मिले या उनका कोई अस्तित्व नहीं पाया गया।
शिक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान शिक्षा व्यवस्था में भी कमियां सामने आईं। एक विद्यालय में स्वीकृत पदों के मुकाबले शिक्षक कम मिले। स्कूल परिसर में भी अव्यवस्थाएं और रखरखाव की कमी दिखाई दी। जिला परिषद की रिपोर्ट के आधार पर अब संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं में लापरवाही और अनियमितता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।