संक्रमण का कोई टीका नहीं
हैरानी की बात तो यह है कि इतनी गायों की मौत के बाद भी पशुपालन विभाग ने गोवंश के इलाज के लिए कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि इसका कोई टीका नहीं है। उधर, गोशाला संचालक देशी तरीके से संक्रमित गोवंश का इलाज कर रहे हैं। संक्रमण की चपेट में आए गोवंश को अलग रखकर इलाज किया जा रहा है। स्थानीय लोग धूप और नीम के पत्तों का रस देकर उनका उपचार कर रहे हैं।
यह हैं बीमार के लक्षण
पशु चिकित्सक के अनुसार लंपी स्किन डिसीज का सबसे ज्यादा असर दुधारू पशुओं पर दिख रहा है। यह डिसीज होने पर पशुओं के शरीर पर गांठें बनने लगती हैं। उन्हें तेज बुखार आता है, साथ ही सिर और गर्दन में तेज दर्द होता है। डिसीज के चपेट में आने से पशुओं के दूध देने की क्षमता भी घट जाती है।
बचाव के लिए बरतें यह सावधानियां
डॉक्टरों ने अनुसार लंपी स्किन डिसीज मच्छरों और मक्खियों जैसे खून चूसने वाले कीड़ों से फैलता है। दूषित पानी और चारे के कारण पशुओं को यह संक्रमण अपनी चपेट में लेता है। अगर किसी पशु में इस बीमारी के लक्षण दिखें तो अन्य गाय-भैंसों से अलग कर दें। किसी अन्य पशु को उनका झूठा पानी या चारा न खिलाएं। साथ ही पशु रखने वाले स्थान पर साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।