कोटपूतली-बहरोड़ जिले के जिणगौर गांव स्थित प्राचीन एवं आस्था के केंद्र हनुमान मंदिर के निकट संचालित खनन गतिविधियों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मंदिर के महंत किशनदास महाराज ने आरोप लगाया है कि मंदिर से करीब 30 मीटर की दूरी पर हो रहे खनन और ब्लास्टिंग कार्य के कारण मंदिर परिसर को गंभीर नुकसान पहुंचा है, लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों ने अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है।
समस्या जस की तस बनी हुई
महंत किशनदास ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि मंदिर और धार्मिक स्थल की सुरक्षा को लेकर वे पिछले कई महीनों से प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब तक जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी तथा खनन विभाग सहित विभिन्न स्तरों पर पांच बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
ब्लास्टिंग के कारण भैरू बाबा की प्रतिमा हुई खंडित
महंत के अनुसार, खनन क्षेत्र में लगातार होने वाली ब्लास्टिंग के कारण मंदिर परिसर में स्थित भैरू बाबा की प्रतिमा खंडित हो गई है। इसके अलावा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगाए गए टिन शेड भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। उनका कहना है कि खनन गतिविधियों के चलते मंदिर परिसर से जुड़ी बगीची पूरी तरह नष्ट हो गई है तथा गौवंश के संरक्षण के लिए बनाई गई गौशाला भी प्रभावित होकर उजड़ गई है।
धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान होती है समस्या
महंत ने आरोप लगाया कि खननकर्ताओं द्वारा ब्लास्टिंग का कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं किया गया है। अचानक होने वाले विस्फोटों से मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भय और असुविधा का सामना करना पड़ता है। साथ ही ब्लास्टिंग के दौरान उड़ने वाली धूल के कारण मंदिर परिसर का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ के दौरान भी धूल और कंपन की समस्या बनी रहती है।
शिकायत दर्ज कराने पर मिलती हैं धमकियां
महंत किशनदास ने यह भी आरोप लगाया कि जब भी वे खनन गतिविधियों का विरोध करते हैं या अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हैं, तो उन्हें विभिन्न प्रकार की धमकियां दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर और धार्मिक स्थल की सुरक्षा को लेकर जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी। उन्होंने सरकार और प्रशासन पर धार्मिक स्थलों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर सनातन संस्कृति और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर जिणगौर गांव के इस प्राचीन मंदिर के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
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महंत ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर के आसपास संचालित खनन कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाए तथा धार्मिक स्थल के निकट हो रहे खनन और ब्लास्टिंग कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जिसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भी मामले की निष्पक्ष जांच कर मंदिर परिसर को संभावित नुकसान से बचाने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और मंदिर संरक्षण को लेकर उठ रही मांगों पर कब तक निर्णय लिया जाता है।