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कोटा में नहीं थम रहा मौतों का सिलसिला: डिलीवरी के बाद एक और प्रसूता की मौत, 24 घंटे में दो महिलाओं ने तोड़ा दम

Sun, 18 Oct 2026 08:32 AM IST
कोटा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा

सार

कोटा में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की मौत का सिलसिला एक बार फिर चर्चा में है। शुक्रवार को 40 वर्षीय रेशमा की मौत के बाद शनिवार को रोशन बैरवा ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रशासन ने मौत की वजह अत्यधिक रक्तस्राव बताई है। इससे पहले जुलाई और अगस्त में भी पांच प्रसूताओं की मौत हुई थी।
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एक और प्रसूता की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के कोटा जिले में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक बार फिर प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आने लगे हैं। शुक्रवार को 40 वर्षीय रेशमा की मौत हुई थी। तो वहीं शनिवार को एक और महिला ने अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बीते 24 घंटे में दो महिलाओं की मौत से एक बार फिर चिकित्सा विभाग पर कई सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन के मुताबिक डिलीवरी के बाद महिला की ब्लीडिंग नहीं रुकी थी और ज्यादा खून बहने की वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं, परिजन बिना पोस्टमार्टम के ही शव ले गए।
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तीसरी प्रेग्नेंसी के दौरान हुई सिजेरियन डिलीवरी
अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि मृतक महिला रोशन बैरवा बारां की रहने वाली थी। उसका बारां और कोटा के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। महिला हाई रिस्क पेशेंट थी और उसे एनीमिया भी था। रात को ही महिला की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी और उसने बच्चे को जन्म दिया था। लेकिन डिलीवरी के बाद महिला की ब्लीडिंग शुरू हो गई। उसे एक यूनिट ब्लड भी चढ़ाया गया था, लेकिन ब्लीडिंग नहीं रुकी। इसके बाद उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। अधीक्षक के मुताबिक, महिला की यह तीसरी प्रेग्नेंसी थी।

सुबह अचानक बिगड़ी तबीयत, आईसीयू में किया शिफ्ट
वहीं, मृतका रोशन बैरवा के पति महेंद्र ने बताया कि शनिवार सुबह उसकी पत्नी की सांस अचानक फूलने लगी और तबीयत भी बिगड़ने लगी। इसके बाद उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। पुलिस और अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल परिजनों की तरफ से कोई रिपोर्ट नहीं दी गई है। वहीं, परिजन शव को अपने साथ ले गए।
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जुलाई-अगस्त में भी पांच प्रसूताओं की हुई थी मौत
इसी साल जुलाई और अगस्त के महीनों में भी पांच प्रसूताओं ने सिजेरियन डिलीवरी के बाद दम तोड़ दिया था। इन मामलों में अस्पताल प्रशासन और उस समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर को क्लीन चिट भी दे दी गई थी। अब 24 घंटे के भीतर दो महिलाओं की मौत के बाद एक बार फिर अस्पताल में प्रसव के दौरान और उसके बाद मिलने वाले उपचार पर सवाल उठने लगे हैं।
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