राजस्थान में चुनावी बिसात बिछ चुकी है। कांग्रेस और बीजेपी ने लगभग सीटों पर अपने-अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। आगामी 25 नवंबर को प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। चुनाव से पहले अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' प्रदेश भर के मतदाताओं का मन टटोलने निकला है। आज हमारा कारवां कोटा पहुंचा है। यहां अमर उजाला ने युवाओं-विद्यार्थियों से चर्चा की और उनके मुद्दों को जानने की कोशिश की। वहीं, युवाओं ने भी खुलकर अपने चुनावी मुद्दे बताए।
'विद्यार्थियों को होती हैं कई समस्याएं'
कोटा में अमर उजाला से बात करते हुए एक युवा ने कहा कि यहां पर दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से विद्यार्थी शिक्षा के लिए आते हैं। उनको तमाम दिक्कतें होती हैं। यहां पर कैंटीन की व्यवस्था होनी चाहिए। यहां के स्थानीय मंत्री जी को हमने पहले ही ज्ञापन दिया था, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई है। यहां पर विद्यार्थियों की गाड़ियां चोरी हो जाती हैं। विद्यार्थियों के लिए मूलभूत सुविधा जैसे कक्षाएं समय पर न लगना और वाटर कूलर की समस्या जैसी बहुत सारी समस्याएं हैं, जिनके बारे में हम पहले ही सूचित कर चुके हैं। लेकिन अभी तक समाधान नहीं निकला है।
'मंत्री जी अपने काम में असफल रहे'
जयेश शर्मा ने बताया कि राजकीय कला महाविद्यालय हाड़ोती क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित महाविद्यालय है। इसमें पूरे क्षेत्र से लगभग आठ हजार विद्यार्थी शिक्षा के लिए आते हैं। जब विद्यार्थी यहां आता है तो वह सोचता है कि इस कॉलेज में पढ़ाई का अच्छा वातावरण मिलेगा। लेकिन जब वह यहां की कक्षाओं का हाल देखता है तो निराशा होती है। पीने के पानी के वाटर कूलर गंदे हैं, उसमें कीड़े हैं। उसका पानी पीने से स्वास्थ्य हानि होगी। कक्षाओं के पंखे टूटे, अध्यापकों का विद्यार्थियों के प्रति व्यवहार अच्छा नहीं है। ऐसी छोटी-छोटी कई समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि यहां के जो स्थानीय मंत्री हैं धारीवाल जी कांग्रेस के, उनको हमने यहां समस्याओं से कई बार अवगत कराया है। लेकिन उनका कॉलेज की समस्याओं पर ध्यान तक नहीं गया। बाहर से उन्होंने सुंदरीकरण करवाया कॉलेज का, लेकिन आंतरिक भी कराना चाहिए था। उसमें मंत्री जी असफल रहे।
एक अन्य युवा ने बताया कि इस कॉलेज में करीब आठ हजार विद्यार्थी नामांकित हैं। लेकिन आते करीब एक हजार के आसपास ही हैं। बाकी सात हजार नियमित नहीं आते हैं। इसके लिए कहीं न कहीं कॉलेज की कमी है और विद्यार्थियों की भी कमी है। उनको जागरूक करने के लिए हमने कई बार जागरूकता अभियान भी चलाए, उनसे संपर्क भी किया। उनको हर सूचनाएं उपलब्ध करवाईं। उन्होंने कहा कि इस कॉलेज जिन विद्यार्थियों का दाखिला हुआ है, वह ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों से है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे यहां आ नहीं पा रहे हैं। ऐसी योजना होनी चाहिए कि बच्चों को यहां पर अधिक से अधिक बुलाएं। बुलाने के बाद उनके लिए अच्छे तरीके से छात्रावास की व्यवस्था की जाए। इनके अभाव में बच्चे यहां अपने खर्चे पर रह नहीं पाते, जिससे उनकी पढ़ाई और भविष्य दोनों खराब होते हैं।
'कोटा में रोजगार के संसाधन बहुत कम हैं'
उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर कहा कि बच्चा कॉलेज से पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद बेरोजगार हो जाता है। यहां पर काम करने के लिए कोई उद्योग धंधे, कोई फैक्ट्री बगैरह रोजगार के संसाधन बहुत कम हैं, जिन चीजों पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया है। कोटा में सरकार ने शिक्षा को बढ़ावा दिया है और इसके सौंदर्यीकरण पर ध्यान दिया है। लेकिन रोजगार-कारोबार पर कोई खास फोकस नहीं किया है। लोकसभा अध्यक्ष हमारे यहां के हैं। उन्होंने भी केंद्र सरकार पर कोई दबाव नहीं बनाया जिससे यहां उद्योग धंधे आ सकें। धारीवाल जी ने लगभग-लगभग कोशिश की है रोजगार को लेकर, उन्होंने एक फैक्टरी डाली है रोजगार के लिए उधर। कोटा में कहीं न कहीं जेके जैसी फैक्टरियां बंद हो चुकी हैं, उन्हें शुरू किया जाना चाहिए। यह पिछड़ा शहर है, बेरोजगारी बढ़ती जा रही है कोटा में।