अंधेरे में ऊर्जा मंत्री ने ली बैठक
- फोटो : Amar Ujala
राजस्थान के कोटा जिले में जिला परिषद कार्यालय में आयोजित ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर की समीक्षा बैठक के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई। बिजली जाने के बाद मंत्री ने करीब छह मिनट तक आपूर्ति बहाल होने का इंतजार किया। जब बिजली नहीं आई तो जनरेटर चालू कर बैठक दोबारा सुचारु रूप से शुरू की गई। उस समय जिला परिषद के अधिकारी और कर्मचारी बैठक में मौजूद थे।
रविवार दोपहर कोटा प्रवास के दौरान ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने जिला परिषद कार्यालय में सांगोद विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की। बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद मीटिंग हॉल की बिजली चली गई। इसके बावजूद मंत्री ने चर्चा जारी रखी। बिजली विभाग को बैठक की जानकारी होने के बावजूद निर्धारित समय में आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। इसके बाद जिला परिषद के कर्मचारियों ने जनरेटर चालू कर बिजली व्यवस्था बहाल की। पूरी प्रक्रिया में करीब छह से सात मिनट का समय लगा।
अधिकारियों की कार्यशैली पर जताई नाराजगी
बैठक के दौरान ऊर्जा मंत्री ने विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए कुछ अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि काम को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति ठीक नहीं है और इसमें तत्काल सुधार होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि तय समय सीमा में विकास कार्य पूरे किए जाएं और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। मंत्री ने मॉनिटरिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नया फॉर्मूला भी सुझाया। उन्होंने निर्देश दिए कि तीन-तीन ग्राम पंचायतों का एक क्लस्टर बनाकर प्रत्येक क्लस्टर में एक जेईएन (JEN) की ड्यूटी लगाई जाए। साथ ही ग्राम पंचायत मुख्यालय पर उनके नियमित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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श्मशान घाटों और ग्रामीण रास्तों की व्यवस्थाओं की समीक्षा
बैठक में ऊर्जा मंत्री ने श्मशान घाटों और खेतों के रास्तों की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बरसात के दौरान कई स्थानों पर श्मशान घाटों में पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार में परेशानी होती है। भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए कि लोगों को तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़े। उन्होंने निर्देश दिए कि श्मशान घाटों में टीन शेड के स्थान पर आरसीसी (RCC) शेड विकसित किए जाएं, ताकि बारिश के मौसम में भी लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा खेतों और श्मशान घाटों तक जाने वाले रास्तों को भी प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने के निर्देश दिए।