कोटा के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गंभीर लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। अस्पताल के गायनिक वार्ड में भर्ती 6 प्रसूताओं की अचानक तबियत बिगड़ गई, जिनमें से एक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई, वहीं अन्य पांच महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है।
गलत दवा देने का आरोप
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत वाली महिलाओं को नेफ्रोलॉजी और गायनिक वार्ड में भर्ती कर विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ द्वारा गलत दवा या इंजेक्शन दिए जाने के कारण यह स्थिति बनी।
विधायक संदीप शर्मा ने की परिजनों से मुलाकात
सूचना मिलने पर कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली। विधायक ने बताया कि कुल 13 महिलाओं को दवाएं दी गई थीं, जिनमें से 6 की हालत बिगड़ी है। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता बाकी महिलाओं की जान बचाना है। मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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जांच समिति गठित
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच के लिए दो अलग-अलग समितियां गठित की हैं। एक टीम प्रभावित महिलाओं के उपचार और निगरानी में जुटी है, जबकि दूसरी टीम संक्रमण और संभावित कारणों की जांच कर रही है।
किडनी में संक्रमण की आशंका
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन के अनुसार प्रभावित महिलाओं में प्लेटलेट्स कम होना, ब्लड प्रेशर गिरना और यूरिन बंद होने जैसे गंभीर लक्षण सामने आए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं की किडनी में संक्रमण फैलने की आशंका है। फिलहाल सभी मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है, लेकिन वे अभी खतरे से पूरी तरह बाहर नहीं हैं।
डॉक्टरों की टीम यह भी जांच कर रही है कि कहीं यह किसी विशेष एंटीबायोटिक का रिएक्शन तो नहीं था या फिर आईवी फ्लूइड में कोई खराबी थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।
स्टाफ पर लापरवाही के आरोप
दूसरी ओर मृतका पायल के परिजनों और अन्य मरीजों के रिश्तेदारों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। प्रसूता रागिनी के पति लोकेश मीणा ने बताया कि रात में उनकी पत्नी का यूरिन बंद हो गया था, लेकिन शिकायत के बावजूद स्टाफ ने गंभीरता नहीं दिखाई।
फिलहाल ज्योति, चंद्रकला, धन्नी और रागिनी सहित अन्य महिलाओं का इलाज जारी है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने सभी नवजात शिशुओं को अलग वार्ड में शिफ्ट कर दिया है। उनकी देखभाल के लिए डॉक्टरों की अलग टीम तैनात की गई है, ताकि उन्हें किसी भी संक्रमण से बचाया जा सके।