कोटा-चित्तौड़गढ़ नेशनल हाईवे पर बने हैंगिंग ब्रिज पर गौ रक्षकों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने झालावाड़ से जयपुर जा रही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का काफिला रोक दिया। इस दौरान राजे ने प्रदर्शन कर रहे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से ट्रैफिक रोकने से संबंधित जानकारी ली। वही वसुंधरा राजे का काफिला रुकने से कोटा पुलिस में भी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में रेंज के आईजी, शहर पुलिस अधीक्षक सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की।
दरअसल गौ रक्षक कोटा शहर में मृत गायों के निस्तारण की समस्या से काफी परेशान थे। इसी को लेकर वे पदयात्रा निकाल रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के आने की जानकारी मिलते ही गौ रक्षकों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने राज्य के काफिले को बीच में ही रोक लिया और अपनी समस्या उन्हें बताई, जिसके बाद राजे ने मौके से ही जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से फोन पर बात कर प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए। इस बीच करीब आधा घंटे तक मौके पर जाम की स्थिति भी बनी रही।
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गौ रक्षकों ने राजे के सामने नगर निगम प्रशासन और ठेकेदार पर आरोप लगाए और कहा कि मृत गायों को बंदा धरमपुरा के पास खाली प्लॉट में खुले में फेंक दिया जाता है। जो न सिर्फ क्रूरता की निशानी है बल्कि इससे हिंदू धर्म की पवित्र भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी नगर निगम और कलेक्टर के सामने अपना आक्रोश जताया जा चुका है। उसके बावजूद भी प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं की मांग है कि मृत गायों को खुले में ना डाला जाए, बल्कि पूरे रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाए।
आपको बता दें कि कुछ दिन पहले गाय के मांस को उबालने काटने के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे। इसके विरोध में हिंदू संगठनों और गौ रक्षकों ने पहले नगर निगम और बाद में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था और इसी के विरोध में पदयात्रा भी निकाली जा रही थी।