कोटा उत्तर नगर निगम बोर्ड की बैठक में बुधवार को जमकर हंगामा देखने को मिला। बैठक शुरू होते ही भाजपा और कांग्रेस के वार्ड पार्षद आमने-सामने आ गए और एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए एक-दूसरे को तख्तियां और बैनर दिखाए। वहीं, इसी बीच कांग्रेस के पार्षद नीचे लाॅबी में उतर गए और जमकर नारेबाजी करते हुए ही पार्टी की महापौर को घेर लिया और बजट पेश न करने की चेतावनी तक दे डाली। वहीं, पार्षदों ने बोर्ड की बैठक में मौजूद अधिकारियों को भी जमकर खरी खोटी सुनाई और अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकार के इशारे पर काम करने की बात कही।
वहीं, उप महापौर सोनू कुरैशी ने माइक बंद करने का आरोप लगाया और कहा कि पहले कांग्रेस सरकार में कोटा नगर निगम उत्तर में कांग्रेस का बोर्ड बना था। लेकिन सरकार बदलते ही अधिकारियों ने कांग्रेस पार्षदों को दरकिनार कर दिया और वार्ड में काम करने से भी मना कर दिया। यहां तक ही महापौर मंजू मेहरा जो की कांग्रेस से पार्षद चुनकर आई और महापौर बनी, वो भी कांग्रेस पार्षदों की नहीं सुन रही है। इससे नाराज होकर कांग्रेस पार्षदों ने महापौर की गाड़ी को रोक लिया और जमकर नारेबाजी की।
इस बीच कोटा उत्तर निगम का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश किया गया। प्रस्तावित बजट में 701.35 करोड़ रुपये की आय व 697.84 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान का अनुमान है। बैठक में बजट के अलावा 12 बिंदुओं रखे गए हैं। बजट में आय पिछले वित्तीय वर्ष के बजट से 262.89 करोड़ रुपये अधिक और खर्च 164. 54 करोड़ रुपये अधिक संभावित है। बोर्ड की बैठक दोपहर तीन बजे के करीब शुरू हुई। लेकिन पांच मिनट बाद ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। इसी बीच कांग्रेसी पार्षद दो बार वेल में आ गए। पार्षदों ने अपनी मांगों के पोस्टर भी लहराए। करीब 45 मिनट तक हंगामा चलता रहा। इसी बीच राष्ट्रगान शुरू हुआ और बोर्ड की मीटिंग खत्म हो गई।
वहीं, बैठक खत्म होते ही कांग्रेस के पार्षद महापौर के चैंबर में गए और महापौर मंजू मेहरा का घेराव कर लिया। कांग्रेस पार्षदों ने महापौर मंजू मेहरा को खरी-खरी सुनाई। उसके बाद महापौर गाड़ी में बैठकर जाने लगी तो कांग्रेस की महिला पार्षद महापौर की गाड़ी के आगे खड़ी हो गई। काफी देर तक कांग्रेस की महिला पार्षदों ने आक्रोश जताया और मांगों को सुनने की पार्षदों ने महापौर के सामने मांग रखी। उसके बाद महापौर गाड़ी से उतरकर वापस अपने चैंबर में आ गई। कांग्रेसी पार्षद भी उनके पीछे-पीछे महापौर चैंबर में पहुंच गए और अपनी बात महापौर के सामने रखी।