जिले के पिड़ावा थाने के तत्कालीन एसएचओ द्वारा रिश्वत लेने के 16 साल पुराने मामले में कोटा एसीबी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तत्कालीन एसएचओ महेशचंद्र शर्मा को 3 साल के कठोर कारावास और 60 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं रिश्वत लेने में शामिल उसके नौकर विकास जैन को भी 3 साल की सजा और 15 हजार रुपए जुर्माना देने का आदेश दिया गया है।
जानकारी के अनुसार मामला साल 2009 का है। तत्कालीन पुलिस निरीक्षक महेशचंद्र शर्मा पर आरोप था कि उसने एक शराब कारोबारी का नाम केस से हटाने के एवज में 1 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। सहायक निदेशक अभियोजन जया गौतम ने बताया कि परिवादी मांगीलाल ने 4 जून 2009 को झालावाड़ एसीबी चौकी में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में कहा गया था कि वह पिड़ावा में देशी शराब का ठेकेदार है, जबकि उसी क्षेत्र का एक व्यक्ति घीसाराम धोबी अवैध शराब का कारोबार करता था। घीसाराम ने परिवादी के एक कर्मचारी के खिलाफ पिड़ावा थाने में झूठा मामला दर्ज करा दिया था, जिसके बाद पुलिस निरीक्षक ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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जब परिवादी अपने कर्मचारी को छुड़ाने थाने पहुंचा तो निरीक्षक महेशचंद्र शर्मा ने उसे भी मुलजिम बनाने की धमकी दी और कार्रवाई को कमजोर करने के लिए एक लाख रुपए की रिश्वत मांगी। डर के कारण परिवादी ने 50 हजार रुपये उसी दिन दे दिए। इसके बाद एसीबी ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई।
ट्रैप की कार्रवाई के दौरान आरोपी पुलिस निरीक्षक ने 15 हजार रुपये की रिश्वत अपने सरकारी क्वार्टर के पास नौकर विकास जैन से दिलवाई। परिवादी के इशारे पर एसीबी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को रंगेहाथ पकड़ लिया।
यह मामला साल 2010 से एसीबी कोर्ट में विचाराधीन था। अदालत में अभियोजन पक्ष ने 10 गवाहों के बयान कराए। सभी साक्ष्यों और गवाही के आधार पर कोर्ट ने अब फैसला सुनाते हुए महेशचंद्र शर्मा और उसके नौकर विकास जैन दोनों को दोषी ठहराते हुए एसएचओ तीन साल की सजा सुनाई है।