कोटा के मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में प्रसुताओं की मौत और किडनी फेल्योर के मामलों की जांच पूरी हो गई है। कोटा, जयपुर, जोधपुर और दिल्ली की चार अलग-अलग कमेटियों ने जांच के बाद चिकित्सकों को क्लीन चिट दी है। इसके बाद निलंबित तीन वरिष्ठ चिकित्सकों को बहाल कर दिया गया है।
मई में सामने आए थे किडनी फेल्योर के मामले
राजस्थान के कोटा जिले में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में प्रसुताओं की मौत और किडनी फेल्योर के मामले में चिकित्सकों को राहत मिली है। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए गठित अलग-अलग उच्च स्तरीय कमेटियों ने डॉक्टरों को क्लीन चिट दी है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि घटनाक्रम में चिकित्सकों की ओर से कोई चिकित्सकीय लापरवाही नहीं बरती गई। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद चिकित्सा विभाग ने निलंबित किए गए तीनों वरिष्ठ चिकित्सकों को बहाल कर दिया है।
नए अस्पताल और जेके लोन में सामने आए थे मामले
जानकारी के अनुसार इस साल मई में नए अस्पताल में भर्ती प्रसुताओं में किडनी फेल्योर के गंभीर मामले सामने आए थे। इसी तरह का मामला जेके लोन अस्पताल में भी सामने आया था। इस बहुचर्चित घटनाक्रम में पांच प्रसुताओं की मौत हुई थी। इनमें पायल, ज्योति, प्रिया, पिंकी और शिरीन शामिल थीं।
मामला सामने आने के बाद तीन डॉक्टर निलंबित हुए
घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसी कार्रवाई के तहत चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर बीएल पाटीदार, एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर खुशबू मीना और सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर नवनीत कुमार को निलंबित किया गया था।
चार कमेटियों ने की पूरे मामले की जांच
जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉक्टर निर्मला शर्मा के अनुसार जांच रिपोर्ट आने के बाद तीनों डॉक्टरों को बहाल कर दिया गया है। इनमें दो गायनी विभाग और एक सर्जरी विभाग से जुड़े हैं। तीनों ने शनिवार को ड्यूटी भी ज्वाइन कर ली।
कोटा मेडिकल कॉलेज ने भी बनाई थी जांच कमेटी
इस मामले में मेडिकल कॉलेज कोटा ने अपने स्तर पर भी एक जांच कमेटी गठित की थी। इसके बाद सरकार ने मेडिकल कॉलेज जयपुर से भी एक टीम बनाकर कोटा भेजी थी। मामला बढ़ने के बाद एम्स की टीम ने भी कोटा पहुंचकर जांच की। इस टीम में दिल्ली के साथ-साथ जोधपुर और अन्य एम्स के चिकित्सक शामिल थे।
दवाओं से लेकर संक्रमण के स्रोत तक हुई जांच
जांच के दौरान दवाओं, उपचार की प्रक्रिया, संक्रमण के संभावित स्रोतों और मरीजों की केस हिस्ट्री की तकनीकी पड़ताल की गई। रिपोर्ट के अनुसार कोटा, जयपुर, जोधपुर और दिल्ली की चार कमेटियों ने चिकित्सकों को क्लियरेंस दिया है। कमेटियों के निष्कर्ष के मुताबिक डॉक्टरों ने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत मरीजों का उपचार किया था और चिकित्सकीय लापरवाही सामने नहीं आई।
तीनों डॉक्टरों ने संभाली ड्यूटी
जांच रिपोर्ट के बाद निलंबन समाप्त होने से तीनों वरिष्ठ चिकित्सकों की अस्पताल में वापसी हो गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार दो गायनी और एक सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने शनिवार को अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली। इस तरह मई में सामने आए प्रसुताओं की मौत और किडनी फेल्योर के मामले में हुई विभागीय कार्रवाई के बाद अब जांच कमेटियों की रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सकों को राहत मिली है।