कोटा मेडिकल कॉलेज के अधीन आने वाला नया अस्पताल एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस साल ही कुछ महिलाओं की किडनी फेल्योर से हुई मौत के बाद फिर से दो प्रसूताओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इन दोनों प्रसूताओं की तबीयत सिजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ गई। इसके बाद दोनों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के अधीन भर्ती करवाया गया है। दोनों प्रसूताओं के यूरिन आउटपुट में अचानक समस्या सामने आई थी। समस्या ज्यादा गंभीर होने के बाद एक प्रसूता को उसके परिजन निजी अस्पताल ले गए हैं, वहीं दूसरी प्रसूता का अस्पताल में उपचार जारी है।
डिलीवरी के कुछ घंटे बाद बिगड़ी तबीयत
नए अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि छावनी एक मीनार मस्जिद के पास रहने वाली रेशमा और निमोदा हरि जी का गांव निवासी अनीता की सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। डिलीवरी के कुछ घंटे बाद दोनों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रसूताओं का यूरिन आउटपुट पूरी तरह बंद नहीं हुआ था। हालांकि, बेहतर इलाज के लिए दोनों प्रसूताओं को नेफ्रोलॉजी विभाग के अधीन सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।
एसडीपी मशीन खराब होने की बात आई सामने
इधर, मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल के ब्लड बैंक में एसडीपी तैयार करने वाली एफेरेसिस मशीन खराब होने का मामला भी सामने आया है। इस बारे में डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि मशीन का एक पार्ट खराब था, जिसे ठीक करने का लगातार प्रयास किया गया। अब मशीन के लिए नया पार्ट मंगवाया गया है।
परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप
प्रसूताओं के परिजनों का कहना है कि अस्पताल की मशीन खराब होने के कारण प्लेटलेट्स नहीं मिल पाए, जिससे मरीज की तबीयत बिगड़ती चली गई। प्रसूता अनीता के पति हंसराज ने आरोप लगाया कि अनीता को गलत ड्रिप चढ़ाई गई, जिसके बाद उसकी तबीयत खराब हुई। उनका कहना है कि कुछ नर्स आपस में गलत ड्रिप चढ़ाने को लेकर बातचीत कर रही थीं। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने दूसरे मरीज की बात होने की जानकारी दी।
परिजनों के अनुसार, प्रसूता अनीता को सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) नहीं मिलने के कारण उन्हें एमबीएस अस्पताल जाना पड़ा। इस प्रक्रिया में काफी समय भी बर्बाद हुआ। हालांकि, गलत ड्रिप चढ़ाने और प्लेटलेट्स उपलब्ध नहीं होने से तबीयत बिगड़ने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पांच प्रसूताओं की मौत के बाद भी उठे सवाल
आपको बता दें कि इसी साल 5 मई को मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं की किडनी खराब होने का मामला सामने आया था। इस घटनाक्रम में एक के बाद एक पांच प्रसूताओं की मौत हो गई थी। इनमें पायल, ज्योति, पिंकी, प्रिया और शिरीन शामिल थीं। इस घटना के बाद हाड़ौती से लेकर पूरे प्रदेश के चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया था।
उस समय भी प्रसूताओं के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए थे। इसके बाद कुछ चिकित्सकों और नर्सिंगकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी, लेकिन जांच में सभी को क्लीन चिट दे दी गई। अब इसी तरह का एक और मामला सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं, मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने और जिम्मेदारी तय करने को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।