राजस्थान के कोटा के सरकारी अस्पताल में सिजेरियन के बाद दो प्रसूताओं की मौत और एक महिला की तबीयत बिगड़ने के मामले में औषधि विभाग ने छह दवाओं के इस्तेमाल और सप्लाई पर रोक लगा दी है।
कोटा के सरकारी अस्पताल में सिजेरियन के बाद दो प्रसूताओं की मौत और एक महिला की तबीयत बिगड़ने के मामले में औषधि विभाग ने छह दवाओं के इस्तेमाल और सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। जांच के दौरान सामने आया कि सिजेरियन के बाद पीड़ित महिलाओं को इंजेक्शन लगाते ही तेज कंपकंपी छूटने लगी थी। इसके बाद ड्रग विभाग की टीम ने संबंधित छह दवाओं के सैंपल जुटाकर जांच के लिए लैब भेजे हैं।
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सहायक औषधि नियंत्रक प्रहलाद मीणा के अनुसार रविवार को टीम ने अस्पताल पहुंचकर मरीजों को दी गई दवाओं के सैंपल एकत्र किए। घटना के पहले दिन एक आईवी फ्लूइड पर संदेह जताया गया था, लेकिन पूर्व जांच रिपोर्ट में वह मानकों के अनुरूप मिला था।
छह दवाओं के विशेष बैच रोके
ड्रग विभाग ने छह अलग-अलग दवाओं के विशेष बैच की सप्लाई और उपयोग पर रोक लगाई है। इनमें 1 ग्राम मेरोपेनम इंजेक्शन के दो बैच D0032631B और D0032640A शामिल हैं। इसके अलावा एनएस 100 एमएल के बैच 2614041065, हाइड्रोकोर्टिसोन सोडियम सक्सीनेट इंजेक्शन के बैच HC125095, डोपामाइन हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन के बैच DHA12505 तथा पेरासिटामोल इन्फ्यूजन के बैच 26EPC013 की सप्लाई पर पाबंदी लगाई गई है।
प्रसूता की मौत पर अस्पताल का बयान
रोशन की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन ने बताया कि उन्हें पुराने टांकों वाले स्थान पर दर्द की शिकायत के बाद लेबर रूम में भर्ती कराया गया था। वह कुपोषण से पीड़ित थीं, हालांकि उनकी सोनोग्राफी रिपोर्ट सामान्य आई थी। रात करीब 12 बजे दर्द बढ़ने पर डॉक्टरों ने सर्जरी की। इसके बाद सुबह लगभग सात बजे अचानक उन्हें घबराहट और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। बहुत अधिक ब्लीडिंग होने के कारण मरीज की स्थिति बिगड़ती चली गई।