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खजाने के लालच में किसने ली मासूमों की बलि?

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राजस्थान में अलवर जिले के पहल गाँव के एक खंडहर में दबे कथित खज़ाने के लालच में हुई दो बच्चों की कथित 'बलि' की गुत्थी सुलझाने में पुलिस डेढ़ महीने से जूझ रही है।
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इस मामले में दो दिन पहले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है लेकिन जिस तांत्रिक पर बलि करवाने का आरोप है वह अभी तक पुलिस की पहुँच से दूर है।

मुण्डावर के सब-इन्स्पेक्टर राजवीर सिंह ने बीबीसी को बताया कि राजस्थान पुलिस की टीम राज्य के बाहर तांत्रिक की तलाश में भेजी गई है। उनके मुताबिक अब तक की तफ्तीश में यह बाल तस्करी का प्रयास नहीं लगता।

गायब होते बच्चे

भीम कुमार के दोनों बेटे राहुल और बिट्टू के शव 20 मई को गाँव के पास वाली पहाड़ी पर मिले थे। भीम कुमार ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, “ इन दस-बारह सालों में गाँव से बच्चे गायब होने की यह चौथी घटना है।

अगर पुलिस ढंग से तफ्तीश करे तभी सब मामलों की तह तक पहुँच सकती है।” भीम कुमार ने कहा कि भूतेश्वर मंदिर के पास वाली पहाड़ी के ऊपर वाले खँडहर में गड़ा कथित खज़ाना अक्सर चर्चा में रहता है।

यहाँ रात को बीन बजाने वाले किसी बाबा ने भी डेरा डाल लिया था जिसे बाद में गांववालों ने भगाया। भीम कुमार के मुताबिक बच्चों के गायब होने के पहले मुख्य अभियुक्त विक्रम ने भी इस कथित खज़ाने की चर्चा कुछ लोगों से की थी। उनके अनुसार सह अभियुक्त जीतराम भी अपनी बहन के साथ पहाड़ी के पास देखा गया था।
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'तांत्रिक फैला रहा भ्रांतियां'

गिरफ्तार किए गए लोगों ने बयान दिया है कि तांत्रिक ने उन्हें कहा कि एक ही माँ के 7 से 10 वर्ष तक के दो बच्चों की एक साथ बलि देने पर ही गड़ा धन निकाला जा सकता है।

जिले में शिक्षा और जागरूकता की दिशा में कार्य कर रहे मेवात विकास संस्थान के नूर मोहम्मद ने बताया, “ अक्सर पुरानी मजारें और कब्रें खोदने की घटनाएँ भी सुनने में आती हैं।

अशिक्षित और गरीब तो मजबूरी में तांत्रिकों के चक्कर में आ जाते हैं पर बदलती लाइफस्टाइल से भी लोगों में धन का लालच बढ़ता जा रहा है।” उधर भीम कुमार का परिवार भयंकर सदमे में हैं। उनकी पत्नी की हालत इतनी ख़राब है कि वो रोते-रोते बेकाबू हो जाती है और उन्हें अभी भी नींद के इंजेक्शन देने पड़ रहे हैं।
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