सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की दो खादिम संस्थाओं ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा दिए गए 5.47 करोड़ रुपये (10 लाख डॉलर) अनुदान में से अपना हिस्सा बांट लिया है।
भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सलमान बशीर ने शुक्रवार को दरगाह कमेटी और खादिमों की दो अंजुमन कमेटी की मौजूदगी में अनुदान का चेक सौंपा था। अंजुमन सैयद और अंजुमन शेख को जरदारी के नजराने में से क्रमश: 3 करोड़ और एक करोड़ रुपये मिले जबकि दरगाह कमेटी के हिस्से में 1.47 करोड़ रुपये आए। इस वर्ष 8 अप्रैल को सपरिवार अजमेर शरीफ की दरगाह पर जियारत के लिए आए जरदारी ने 10 लाख डॉलर का अनुदान दिए जाने की घोषणा की थी।
खादिमों और दरगाह कमेटी के बीच प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। खादिमों की संस्थाएं अनुदान में दरगाह कमेटी को हिस्से देने के खिलाफ थीं लेकिन बाद में किसी तरह से मामला सुलझा। सूत्रों ने कहा कि बंद दरवाजे के भीतर पाक उच्चायोग के प्रतिनिधियों और तीनों पार्टियों के बीच हुई बातचीत के बाद अनुदान के तीन हिस्सा किए जाने पर सहमति बनी।
अंजुमन सैयद के सचिव वाहिद हुसैन चिश्ती ने कहा कि अतिथि गृहों की मरम्मत, श्रद्धालुओं को सुविधाएं मुहैया कराने, विधवाओं और जरूरतमंदों की मदद करने और गरीब बच्चों की शिक्षा पर पैसों को खर्च किया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि सामान्य तौर पर ऐसे अनुदानों का 80 फीसदी हिस्सा खादिमों और 20 फीसदी हिस्सा अंजुमन कमेटी को मिलता है।