जयपुर में आयोजित सेमीनार में उपस्थित सदस्य।
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केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जयपुर में विधानसभा के डिजिटल हॉल में राज्य स्तरीय विज्ञान सेमीनार का आयोजन किया। सेमीनार में केकड़ी के दो बाल वैज्ञानिक भी शामिल हुए, जिन्होंने अपनी प्रस्तुति से विशेषज्ञों को काफी प्रभावित किया।
केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा स्कूली छात्रों में नवाचारी सोच के साथ सृजनात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के उद्देश्य से नियमित रूप से वर्ष पर्यंत विज्ञान प्रतियोगिताएं और अन्य गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इसी क्रम में जयपुर में विधानसभा के डिजिटल हॉल में राष्ट्रीय विज्ञान सेमीनार का राज्य स्तरीय आयोजन किया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के जिला समन्वयक ब्रजराज शर्मा ने बताया कि सेमीनार का मुख्य विषय "कृत्रिम बुद्धिमत्ता संभाव्यता एवं सरोकार" था।
इस विषय पर केकड़ी के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा 10 की छात्रा अदिति आछेरा पुत्री ओमप्रकाश आछेरा ने मीता व्यास के निर्देशन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के गुण और दोष पर अपने तथ्यात्मक विचार प्रस्तुत किए। इसी प्रकार केकड़ी के महात्मा गांधी राजकीय पायलट विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा 7 की छात्रा वृंदा पांडे पुत्री अभिषेक शर्मा ने भी जिला समन्वयक ब्रजराज शर्मा के निर्देशन में इसी विषय पर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की। दोनों बालिकाओं की सुगठित स्क्रिप्ट और प्रस्तुति से सेमीनार में उपस्थित संभागी प्रभावित हुए।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संबंध में जानकारी देते हुए विभाग के जिला समन्वयक ब्रजराज शर्मा ने बताया कि ऐसी तकनीकें जो कंप्यूटर और मशीनों को ऐसे काम करने की अनुमति देती हैं, जिनमें आमतौर पर मानवीय बुद्धि की आवश्यकता होती है, उन्हें अक्सर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कहा जाता है। ये तकनीकें मशीनों को ऐसे गुणों या क्षमताओं के साथ काम पूरा करने की अनुमति देती हैं जो आमतौर पर मानवीय संज्ञान से जुड़ी होती हैं। जैसे कि तर्क, समस्या समाधान, सामान्य ज्ञान प्रबंधन, योजना, सीखना, अनुवाद, धारणा, दृष्टि, भाषण पहचान और सामाजिक बुद्धिमत्ता।