पूर्व पालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल को उनके कार्यकाल के दौरान लगे विभिन्न भ्रष्टाचार के आरोपों से न्यायिक कमेटी ने पूर्णतः निर्दोष घोषित कर दिया है। जांच कमेटी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में सभी आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया गया।
केकड़ी नगरपालिका के पूर्व पालिकाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के अनिल मित्तल पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे, जिसके चलते स्वायत्त शासन विभाग ने 31 मई 2019 को उन्हें पद से निलंबित कर दिया। जिस पर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। निलंबन के इस मामले में हाईकोर्ट ने सात दिन बाद ही 7 जून 2019 को उन्हें राहत देते हुए पद बहाल करने का आदेश दिया, जिसके बाद मित्तल ने 11 जून 2019 को पुनः पालिकाध्यक्ष का कार्यभार संभाला। इसके बाद केकड़ी नगरपालिका के भाजपा बोर्ड ने अनिल मित्तल के नेतृत्व में पांच साल का अपना कार्यकाल पूर्ण किया।
उधर इस मामले में सरकार के आदेश पर गठित न्यायिक जांच कमेटी ने मित्तल पर लगे विभिन्न आरोपों की विस्तृत जांच की। कमेटी ने रिपोर्ट में बताया कि अनिल मित्तल के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं हुए हैं।
यह है मामला
गौरतलब है कि स्वायत्त शासन विभाग द्वारा प्रस्तुत आरोप पत्र में अनिल मित्तल पर कुल आठ आरोप लगाए गए थे। जिनमें वित्तीय अनियमितता, बिना अनुमोदन के बजट से अधिक खर्च, निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी, नियमों के विपरीत पट्टों का स्वीकृत किया जाना, टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी, अनुबंध नियमों का उल्लंघन, घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग और नगर पालिका को आर्थिक हानि पहुंचाने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे।
न्यायिक कमेटी ने दी क्लीन चिट
न्यायिक जांच संख्या 06/2019 के अंतर्गत राजस्थान सरकार बनाम अनिल मित्तल, अध्यक्ष, नगरपालिका, केकड़ी के इस मामले में न्यायिक कमेटी ने आदेश में कहा कि उभय पक्षों द्वारा दौराने बहस प्रकट किये गये तथ्यों, पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक व दस्तावेजी साक्ष्य के अवलोकन करने के पश्चात निष्कर्ष रूप से देखा जाये तो प्रार्थी विभाग अपचारी के विरूद्ध आरोपित आरोप साबित करने में पूर्णतः असफल रहा है। अतः अपचारी के विरूद्ध आरोपित आरोप प्रमाणित नहीं पाये जाते हैं।
सत्य की जीत
न्यायिक कमेटी का फैसला आने पर पूर्व पालिकाध्यक्ष अनिल मित्तल ने कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। न्यायिक कमेटी की रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित थे। इस रिपोर्ट के आने के बाद मित्तल समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं यह फैसला नगर की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।