अस्पताल में मरीज अपनी बीमारियों के इलाज के लिए भर्ती होता है लेकिन यदि यहां से ही संक्रमण का खतरा हो तो व्यक्ति कहां जाए? जिला मुख्यालय करौली के जिला अस्पताल की हालत कुछ ऐसी ही है। यहां रोगी वार्डों में आवारा पशुओं का आना-जाना लगा रहता है। अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन की इस तरफ से पूरी तरह लापरवाही साफ नजर आती है। आवारा पशुओं की बेरोकटोक आवाजाही तो एक बड़ी समस्या है ही लेकिन अस्पताल परिसर में पसरी गंदगी की तरफ भी किसी का कोई ध्यान नहीं है।
क्षेत्र के हर्ष और मुकेश शुक्ला ने बताया कि अस्पताल में अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि अस्पताल परिसर सहित वार्डों में खुलेआम कुत्ते और आवारा पशु घुस जाते हैं। वार्डों में रोगियों के पलंग के नीचे अक्सर कुत्तों को सोते देखा जा सकता है, इससे ना सिर्फ इनके हमले का खतरा बना रहता है, बल्कि उपचार कराने आए रोगियों के संक्रमित होने का खतरा भी मंडराता रहता है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि हॉस्पिटल में आवारा पशुओं को रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। यही कारण है कि आवारा पशु बेरोकटोक अस्पताल और वार्डों में घूमते नजर आते हैं। इस संबंध में उन्होंने अस्पताल परिसर में गंदगी, अव्यवस्था और प्रशासन तथा अस्पताल प्रबंधन पर भी अनदेखी के आरोप लगाए हैं।