अंतिम यात्रा के लिए मौजूद लोग
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पोस्टमार्टम और अंतिम यात्रा
साध्वी के निधन के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया और 29 जनवरी की रात बालोतरा जिले के परेऊ गांव लाया गया। गांव में बड़ी संख्या में ग्रामीण, साधु-संत और अनुयायी इकट्ठा हुए। पार्थिव देह को आश्रम में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां रात भर भजन-कीर्तन चलता रहा।
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आश्रम में बनी समाधि
30 जनवरी, शुक्रवार को उनके ही स्थापित शिव शक्ति धाम आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा का अंतिम संस्कार किया गया। साधु-संतों की परंपरा के अनुसार पूरी विधि-विधान से उन्हें समाधि दी गई। राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों से भी संत और श्रद्धालु इस अवसर पर पहुंचे। समाधि के समय उनके पिता वीरमनाथ भावुक दिखाई दिए। परेऊ गांव में हर आंख नम थी और श्रद्धालु स्तब्ध थे।
श्रद्धा और सवालों के बीच विदाई
साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन भक्ति, त्याग और संघर्ष का प्रतीक रहा। ट्रक चालक की बेटी से प्रदेशभर में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनने तक का उनका सफर प्रेरणादायक था। उनका संदिग्ध निधन आज भी कई सवाल छोड़ गया है, जिनके उत्तर जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल परेऊ गांव में उनकी समाधि श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का नया केंद्र बन चुकी है।