कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर की ओर से यूनिवर्सिटी सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत गोद लिए गए गांव बिंजवाड़िया व बालरवा में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की दसवीं वर्षगांठ के मौके पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस मौके पर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरुण कुमार की ओर से संदेश दिया गया कि हमें कन्या के जन्म का उत्सव मनाना चाहिए, साथ ही अपनी बेटियों पर बेटों की तरह ही गर्व होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना से पूरे जीवन-काल में शिशु लिंग अनुपात में कमी को रोकने में मदद मिलती है और महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों का भी समाधान होता है। इस दौरान बेटी के जन्मोत्सव पर पेड़ लगाने की अपील भी कृषि विश्वविद्यालय की ओर से ग्राम वासियों से की गई।
राजकीय शिक्षण संस्थाओं में निकाली जागरूकता रैली
इस दौरान दोनों गांव के राजकीय विद्यालयों में बेटी के महत्व पर चर्चा एवं बेटियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। मौके पर विद्यार्थियों की ओर से हमारा मंत्र, "बेटा-बेटी एक समान", बेटी है अनमोल उपहार, शिक्षा है उसका अधिकार", बेटी नहीं है किसी से कम, मिटा दो अपने सारे भ्रम" बेटियों को मत रखो निरक्षर, बेटियां भी बनेगी बड़ी अफसर" सरीखे नारे लगाकर बेटियों को समर्थन देती हुई रैलियां निकाली गई।
गोदित गांव के नोडल अधिकारी डॉ महेंद्र कुमार ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। इस दौरान कृषि महाविद्यालय के डीन, डॉ जीवाराम वर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एम एस चांदावत, डॉ कमल किशोर सैनी, डॉ प्रियंका स्वामी, विभिन्न प्रशिक्षण अधिकारी सहित कृषि विश्वविद्यालय की महिला अधिकारीयों व शिक्षिकाएं मौजूद रही।