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Rajasthan: मांड गायकी का स्वर्णिम अध्याय समाप्त, सुप्रसिद्ध गायिका गवरी देवी का 98 वर्ष की उम्र में निधन

Fri, 12 Jun 2026 03:57 PM IST
जोधपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली

सार

करीब आठ दशक तक मांड गायन की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली गवरी देवी राव का निधन हो गया है। लोक कलाकारों के हितों की मुखर आवाज रहीं गवरी देवी ने अपनी कला और संस्कृति की विरासत नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
 
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सुप्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी का निधन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान की सुप्रसिद्ध मांड गायिका गवरी देवी राव का गुरुवार रात निधन हो गया। वे करीब 98 वर्ष की थीं। लगभग आठ दशकों तक मांड गायन की परंपरा को जीवंत बनाए रखने वाली गवरी देवी अंतिम समय तक सक्रिय रहीं। उनके निधन से राजस्थान की लोक संस्कृति और संगीत जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

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बाड़मेर जिले के कोरण गांव में एक लोक कलाकार परिवार में जन्मी गवरी देवी ने पाली को अपनी कर्मभूमि बनाया। मांड गायकी को देशभर में पहचान दिलाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके निधन की खबर फैलते ही लोक कलाकारों, सामाजिक संगठनों और संस्कृति प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। पाली के गवरी नगर स्थित उनके निवास पर शुक्रवार सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। लोक कलाकारों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

गवरी देवी राव का अंतिम संस्कार शुक्रवार दोपहर पाली के सर्वोदय नगर स्थित मोक्षधाम में किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोक कलाकार, जनप्रतिनिधि और शहरवासी शामिल हुए। सभी ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।
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नई पीढ़ी तक पहुंचाई गायकी की विरासत
गवरी देवी अपने पीछे समृद्ध सांस्कृतिक विरासत छोड़ गई हैं। उन्होंने अपनी बहू सुंदरदेवी और पोती नीतू को मांड गायन की परंपरा सिखाकर इस लोक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। परिवार में उनके पांच पुत्र हैं। दो पुत्रियों में से एक का पूर्व में ही निधन हो चुका है। वर्तमान में परिवार के करीब 30 सदस्य पाली के गवरी नगर स्थित निवास में रहते हैं।

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अनेक सम्मानों से थीं सम्मानित
अपने लंबे सांगीतिक जीवन में गवरी देवी को अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया। वे लोक कलाकारों के हितों की मुखर आवाज मानी जाती थीं और समय-समय पर कलाकारों की समस्याओं को उठाती रही थीं। उनका मानना था कि लोक कलाकारों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा और पर्याप्त सरकारी सहयोग मिलना चाहिए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।

लोक संस्कृति का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त
गवरी देवी के दिवंगत पति मिश्रीलाल राव भी लोक कलाकारों के हितों के लिए सक्रिय रहते थे। वे कलाकारों के लिए पेंशन और आर्थिक सहायता की आवश्यकता पर जोर देते थे। उनका मानना था कि बदलते समय के साथ लोक कलाकारों के लिए आजीविका के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं।
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गवरी देवी राव का निधन केवल एक लोक कलाकार का अवसान नहीं, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है। मांड गायकी को नई पहचान दिलाने और उसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

 

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