जेल में वांगचुक से मिलने पहुंचे माकपा सांसद अमराराम को प्रशासन ने नहीं दी अनुमति
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लेह-लद्दाख हिंसा के आरोपी और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे माकपा सांसद अमराराम को जोधपुर सेंट्रल जेल प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। सांसद के साथ आए कार्यकर्ताओं ने जेल के बाहर नारेबाजी की, लेकिन पुलिस की समझाइश के बाद वे लौट गए।
सेंट्रल जेल पर रोके गए सांसद और कार्यकर्ता
माकपा सांसद अमराराम अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जोधपुर पहुंचे और वांगचुक से मुलाकात करने का प्रयास किया। पुलिस को सूचना मिलते ही पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एडीसीपी नाजिम अली, एडीसीपी सुनील के. पंवार, एडीसीपी वीरेंद्र सिंह और अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजा। सुरक्षा बलों ने सांसद और कार्यकर्ताओं को जेल से कुछ दूरी पर ही रोक दिया।
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बिना अनुमति मुलाकात असंभव
जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति से मुलाकात संभव नहीं है, खासकर तब जब आरोपी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की गई हो। सांसद अमराराम ने मेल के जरिए अनुमति मांगी, लेकिन जेल प्रशासन ने लिखित जवाब में मुलाकात की इजाजत से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद अमराराम और उनके कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें शांत कर समझाइश देकर वहां से रवाना किया।
वांगचुक की गिरफ्तारी और पृष्ठभूमि
जानकारी के मुताबिक, 24 सितंबर को लद्दाख में राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे। वांगचुक पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने का आरोप लगा और उन्हें एनएसए के तहत गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्हें राजस्थान की जोधपुर सेंट्रल जेल भेजा गया। इस घटना के बाद लेह में एहतियातन मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वांगचुक को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया, जबकि वांगचुक ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज किया था।
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