एम्स जोधपुर में सोमवार को सामूहिक आपदा की स्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में अस्पताल की तैयारी, विभागों के बीच समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता और घायलों के त्वरित व प्रभावी उपचार की क्षमताओं का मूल्यांकन करना था।
यह मॉक ड्रिल एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक डॉ. जी. डी. पुरी के निर्देशन में आयोजित की गई। इसमें चिकित्सा अधीक्षक डॉ. महेश देवनानी, आपदा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. ए. एस. संधू, ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभागाध्यक्ष डॉ. महावीर सिंह रोढ़ा और आपदा ड्रिल के नोडल अधिकारी एवं डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट (इमरजेंसी सेवाएं) डॉ. भरत चौधरी ने समन्वय किया।
ड्रिल के तहत बसनी क्षेत्र में एक काल्पनिक बम विस्फोट की स्थिति बनाई गई, जिसमें 15 घायलों को ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभाग में लाया गया। इन ‘मॉलेज मरीजों’ को सिर की गंभीर चोट, अंग विच्छेदन जैसी विभिन्न गंभीर अवस्थाओं में दर्शाया गया। मरीजों की स्थिति के अनुसार त्वरित ट्रायेज कर प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। कुछ घायलों को तत्काल ऑपरेशन थिएटर में भेजा गया, जबकि अन्य को आईसीयू सहित संबंधित वार्डों में भर्ती किया गया।
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इस मॉक ड्रिल में ट्रॉमा एवं इमरजेंसी, सर्जरी, एनेस्थेसिया, रेडियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी सहित कई विभागों की सक्रिय भागीदारी रही। नर्सिंग सेवाओं का नेतृत्व डॉ. सुरेश शर्मा ने किया। अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों और सहायक स्टाफ ने भी अपनी जिम्मेदारियों का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।
ड्रिल की समाप्ति के बाद एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने ड्रिल का मूल्यांकन कर आवश्यक सुझाव दिए। इस अभ्यास ने न केवल वास्तविक आपदा परिस्थितियों में व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया, बल्कि अस्पताल की तैयारियों की समीक्षा कर सुधार की संभावनाएं भी रेखांकित की। एम्स जोधपुर की यह मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता और तत्परता का स्पष्ट प्रमाण है।