साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। उनकी मृत्यु के बाद उनके सोशल मीडिया अकाउंट से किए गए रहस्यमयी पोस्ट ने पुलिस और आम लोगों के बीच हलचल मचा दी थी। अब इस पोस्ट को करने वाला युवक सामने आ गया है। युवक का नाम भोमाराम बताया जा रहा है, जिसने स्वीकार किया है कि उसने यह पोस्ट साध्वी के गुरु वीरमनाथ के कहने पर किया था।
मौत के 4 घंटे बाद किया गया था पोस्ट
भोमाराम ने पुलिस को बताया कि 28 जनवरी की शाम जब साध्वी प्रेम बाईसा की मृत्यु हुई, तब वीरमनाथ ने उसे उनके सोशल मीडिया अकाउंट से एक संदेश पोस्ट करने का निर्देश दिया था। हालांकि यह पोस्ट साध्वी की मौत के लगभग चार घंटे बाद किया गया। भोमाराम के मुताबिक, इस देरी की वजह आश्रम तक पहुंचने में लगा समय और वहां की परिस्थितियां थीं।
गुरु के निर्देश पर किया गया पोस्ट
भोमाराम ने बताया कि वीरमनाथ ने उसे जैसा निर्देश दिया, उसने वैसा ही संदेश इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया। पोस्ट के वायरल होते ही इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग आश्रम पहुंचने लगे। भोमाराम का कहना है कि जब उसने बाद में पोस्ट डिलीट करने की बात कही, तो वीरमनाथ ने मना कर दिया और कहा कि इसे रहने दो, ताकि लोगों को जानकारी मिल सके।
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25 साल से ब्रह्मचर्य का पालन कर रही थीं साध्वी
भोमाराम ने यह भी दावा किया कि साध्वी प्रेम बाईसा पिछले 25 वर्षों से ब्रह्मचर्य का पालन कर रही थीं और उन्होंने अपना जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया था। उसने आरोप लगाया कि कुछ लोग साध्वी और उनके चरित्र को बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान थीं। इसी वजह से पोस्ट में ‘न्याय’ की बात लिखी गई थी, क्योंकि वह इन आरोपों से मुक्ति चाहती थीं।
पुलिस और SIT कर रही है गहन जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और SIT इस पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच कर रही है। अब तक पुलिस 37 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांच में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर साध्वी की तबीयत खराब थी, तो उन्हें तुरंत उचित चिकित्सकीय सहायता क्यों नहीं दी गई? इसके अलावा, मौत के तुरंत बाद पुलिस को सूचना देने के बजाय सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को प्राथमिकता क्यों दी गई?
पोस्टमार्टम और कॉल डिटेल्स से खुलेगा राज
फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर साध्वी की मौत के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि घटना के समय आश्रम में कौन-कौन मौजूद था और किन परिस्थितियों में यह पूरा मामला सामने आया।