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राजस्थान: लॉरेंस गैंग के निशाने पर संयम लोढ़ा, दो इनामी शूटर गिरफ्तार, मोबाइल में मिलीं पूर्व विधायक की फोटो

Fri, 25 Sep 2026 03:15 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

जोधपुर में कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को निशाना बनाने की साजिश का खुलासा करते हुए पुलिस ने लॉरेंस गैंग के दो शूटरों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के मोबाइल से लोढ़ा की तस्वीरें और उनकी रेकी किए जाने के सबूत मिले हैं।
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लॉरेंस गैंग के निशाने पर थे संयम लोढ़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स और जोधपुर पुलिस की संयुक्त पूछताछ में लॉरेंस गिरोह की ओर से कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को निशाना बनाने की साजिश का खुलासा हुआ है। पुलिस ने पंजाब पुलिस की ओर से पांच-पांच लाख रुपये के इनामी दो शूटरों जसकरण सिंह उर्फ करण और राजिंदर उर्फ बिल्ला को गिरफ्तार किया है। दोनों के मोबाइल फोन से पूर्व विधायक की तस्वीरें बरामद हुई हैं। पुलिस के अनुसार शूटरों ने सिरोही स्थित लोढ़ा के फार्म हाउस की कई दिनों तक रेकी की थी।

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पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों शूटरों ने सिरोही में पूर्व विधायक के फार्म हाउस के पास स्थित पहाड़ी पर अपना ठिकाना बनाया था। यहां से वे लोढ़ा के आने-जाने के समय, उनकी गतिविधियों और उनसे मिलने आने वाले लोगों पर नजर रखते थे। उन्होंने वारदात के बाद भागने के लिए सुनसान इलाकों और पहाड़ी रास्तों की भी रेकी की। पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि पूर्व विधायक और उनके भाई के बीच वैचारिक मतभेद थे और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाने की योजना बनाई गई। हालांकि पुलिस इस दावे की पुष्टि के लिए अभी जांच कर रही है।

निकाय चुनाव के कारण नहीं कर सके वारदात
पुलिस के अनुसार निकाय चुनाव के दौरान फार्म हाउस पर पार्षदों और समर्थकों की आवाजाही बढ़ गई थी। इस वजह से शूटरों को वारदात का मौका नहीं मिल सका और उनकी योजना सफल नहीं हो पाई।
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जांच के दौरान पुलिस को शूटरों की संदिग्ध गतिविधियों के सीसीटीवी फुटेज भी मिले हैं। दोनों आरोपी 17 सितंबर की शाम ब्यावर-पिंडवाड़ा राजमार्ग पर अरठवाड़ा गांव के पास स्थित एक होटल पहुंचे थे। वहां उन्होंने फर्जी आधार कार्ड से कमरा लिया और करीब 14 घंटे तक रुके। अगले दिन सुबह दोनों होटल से निकल गए। 23 सितंबर को पुलिस टीम दोनों को मौके की तस्दीक के लिए होटल और बाद में शिवगंज थाने भी ले गई। आरोपियों के मोबाइल में पूर्व विधायक की तस्वीरें मिलने के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई है। सिरोही एसपी पुष्पेंद्र सिंह ने इसे नियमित सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।

झाड़ियों में छिपाकर रखे थे विदेशी हथियार
जोधपुर पुलिस और AGTF ने आरोपियों की निशानदेही पर पाली-सिरोही राजमार्ग पर ढोला गांव के पास घनी झाड़ियों से हथियार बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार राजमार्ग से करीब 200 मीटर दूर बबूल की झाड़ियों में कपड़े की एक थैली छिपाकर रखी गई थी। इसमें से पिस्टल और मैगजीन समेत 36 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।

मारवाड़ का बड़ा कारोबारी भी निशाने पर
जांच में पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि गिरोह के निशाने पर मारवाड़ का एक बड़ा कारोबारी भी था। पुलिस को संदेह है कि शूटरों ने कारोबारी की रेकी की थी और पूर्व विधायक पर हमले के बाद उससे करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने की साजिश रची गई थी। पुलिस सुमेरपुर और शिवगंज क्षेत्र के बड़े कारोबारियों से जुड़ी जानकारियों की भी पड़ताल कर रही है।

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नेपाल से वापस बुलाए गए थे शूटर
AGTF के अतिरिक्त महानिदेशक दिनेश एमएन के अनुसार दोनों शूटर पंजाब में हत्या के दो मामलों को अंजाम देने के बाद नेपाल भाग गए थे। गिरोह के कई प्रमुख शूटरों के अलग-अलग जेलों में बंद होने के बाद विदेशी नेटवर्क से जुड़े लोगों ने दोनों को नेपाल से वापस भारत बुलाकर जोधपुर भेजा। पुलिस के अनुसार आरोपियों को वारदात के बाद फर्जी पासपोर्ट के जरिए नेपाल के रास्ते विदेश भेजने का भरोसा दिया गया था।

दोनों के खिलाफ 12 आपराधिक मामले
पुलिस के मुताबिक जसकरण और राजिंदर के खिलाफ पंजाब में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लूट, मारपीट और आर्म्स एक्ट समेत करीब 12 मामले दर्ज हैं। गिरोह के विदेशी नेटवर्क ने उन्हें जोधपुर में स्थानीय लोगों से सीधे संपर्क नहीं करने के निर्देश दिए थे। हालांकि मोबाइल संपर्कों के आधार पर पुलिस नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।

हरियाणा से लोकल सपोर्ट मिलने का संदेह
पुलिस जांच में पता चला है कि इन शूटरों को स्थानीय स्तर पर हरियाणा के गिरोह के सदस्यों से सहायता मिलने का संदेह है। AGTF की टीम ने हरियाणा से तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इनसे शूटरों को रेकी और रसद संबंधी सहायता देने के संबंध में पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा सात-आठ अन्य संदिग्ध भी पुलिस की निगरानी में हैं।
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AGTF की विशेष टीम हरियाणा में डेरा डालकर मामले की जांच कर रही है। एडीजी दिनेश एमएन खुद पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शूटरों को विदेशी हथियार किसने उपलब्ध कराए, सिरोही में ठहरने और बाइक की व्यवस्था किसने की और स्थानीय स्तर पर उन्हें किस-किस व्यक्ति से मदद मिली।

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