राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार देर रात जोधपुर पहुंचे। मंगलवार को उन्होंने जोधपुर स्थित अस्पताल में भर्ती उन प्रसूता महिलाओं के बारे मे मीडिया से बातचीत की, जिनकी सिजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ गई थी। इस दौरान गहलोत ने राज्य सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कई अन्य मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।
गहलोत ने कहा कि कोटा में प्रसूता महिलाओं की मौत और गंभीर संक्रमण के मामले बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल जाती हैं, लेकिन यदि वहां संक्रमण हो जाए, मौत हो जाए या किडनी फेल जैसी स्थिति पैदा हो जाए तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि बीकानेर और अब जोधपुर से भी ऐसे मामले सामने आने लगे हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि कोटा की घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे। संक्रमण, ऑपरेशन थिएटर की गड़बड़ी या दवाइयों में कोई समस्या थी, इसकी जानकारी जनता को दी जानी चाहिए। बिना जांच पूरी हुए यह कहना कि जोधपुर की घटना कोटा जैसी नहीं है, उचित नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने एम्स और अन्य विशेषज्ञ टीमों को जांच के लिए बुलाया है, यह स्वागत योग्य कदम है लेकिन कोटा की घटना को डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सरकार कारण स्पष्ट नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही को जनता बर्दाश्त नहीं करेगी और आवश्यकता पड़ने पर कांग्रेस आंदोलन करेगी।
गहलोत ने स्वास्थ्य मंत्री के बयानों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके बयान लगातार विवादों में रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना गरीब और अमीर सभी के लिए थी और राजस्थान देश का एकमात्र ऐसा राज्य था, जहां लगभग 90 प्रतिशत जनता इस योजना से जुड़ी थी। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना को सीमित दायरे वाली योजना बताते हुए कहा कि वह सभी नागरिकों के लिए नहीं है।
गहलोत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुन-चुनकर अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ गांवों में हिंदू समुदाय के लोग भी संबंधित दरगाहों में आस्था रखते हैं, फिर भी उन्हें हटाया जा रहा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से इस संबंध में जवाब देने की मांग की।
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पूर्व मुख्यमंत्री ने जयपुर में विकसित किए गए कोचिंग हब का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछली सरकार ने सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च कर आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिसर तैयार किया था लेकिन वर्तमान सरकार उसका उपयोग नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि भवन, लाइब्रेरी, फूड कोर्ट और अन्य सुविधाएं तैयार होने के बावजूद परियोजना बंद पड़ी है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के भुगतान रुके हुए हैं, दो-दो करोड़ रुपये के चेक जारी नहीं हो रहे हैं और पेंशनधारकों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार भुगतान करने में असमर्थ है तो जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर गहलोत ने कहा कि पहले इसका मसौदा सामने आने दिया जाए। उसके बाद इसके प्रावधानों पर चर्चा की जाएगी।
गहलोत ने राज्य में बढ़ती हत्या, दुष्कर्म और अपराध की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि गरीब और पीड़ित लोगों को थानों में न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। जोधपुर के पानी संकट का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पूर्ववर्ती सरकार ने बड़े स्तर पर परियोजनाएं शुरू की थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार उन योजनाओं को समय पर पूरा नहीं कर पा रही है और पानी की समस्या को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा पानी संकट का मजाक उड़ाना उचित नहीं है।
जोधपुर में बन रही एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर गहलोत ने कहा कि इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने स्वयं केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि श्रेय लेने की राजनीति के बजाय परियोजना को जल्द पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। गहलोत ने कहा कि जोधपुर के कुछ भाजपा विधायक स्वयं अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सार्वजनिक रूप से असंतोष जता चुके हैं। इससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं और जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त जैसी स्थिति बन रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया और युवाओं से संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया। गहलोत ने नीट परीक्षा को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्रों से बड़ी मात्रा में शुल्क लिया जाता है, जबकि परीक्षा प्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बताया।