बीते दिनों अमर उजाला ने आम जनता को हो रही परेशानियों को ध्यान में रखते हुए अवैध लैबों के खिलाफ खबर चलाई थी, इसके परिणामस्वरूप प्रशासन ने फिलहाल अवैध रूप से चलाई जा रही इन लैबों को नोटिस देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है।
अब यहां सवाल यह है कि जब इतने बड़े पैमाने पर धड़ल्ले से बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर अवैध जांचघर चलाए जा रहे थे और मनमानी फीस वसूल रहे थे, तब प्रशासन कहां था? क्यों तब ही कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसका सीधा सा मतलब निकलता है कि कहीं ना कहीं लैब वालों को स्वास्थ्य व चिकित्सा विभाग का संरक्षण मिला हुआ है।
इनका कहना है
ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी मुकेश भूपेश का कहना है कि हमने अवैध रूप से चलाई जा रही सभी लैबों को दो दिन में सभी दस्तावेज पेश करने के निर्देश दे दिए हैं। दस्तावेज पेश नहीं करने पर तो लैब को सीज किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजकुमार डांगी का कहना है- मैंने खबर पढ़ते ही सभी को निर्देशित कर दिया है। हम पहले भी कई बार नोटिस दे चुके हैं, अब इनको आखिरी मौका दिया गया है अगर यह रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते हैं तो इन पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।