चार वर्षीय मासूम बच्ची की हत्या के बहुचर्चित मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश आलोक सुरोलिया ने दोषी महिला तरूणाबाई पत्नी रामकरण, निवासी गेहरपुरा, थाना भवानीमंडी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अभियोजन के अनुसार महिला ने मासूम के पैरों में पहनी चांदी की कड़ियां हड़पने के लिए उसकी हत्या कर दी थी।
लोक अभियोजक नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया कि 8 मई 2022 को भवानीमंडी थाना क्षेत्र निवासी लक्ष्मीनारायण मेहर ने अपनी चार वर्षीय बेटी चंचल के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवार में 9 मई को शादी समारोह था। शादी की खरीदारी के लिए परिजन भवानीमंडी गए हुए थे, जबकि बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। दोपहर करीब तीन बजे वह अचानक लापता हो गई। काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला, जिसके बाद पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
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जांच के दौरान पुलिस ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पड़ोस में रहने वाली तरूणाबाई को हिरासत में लिया। पूछताछ और जांच में सामने आया कि आरोपी ने बच्ची की हत्या कर उसके पैरों में पहनी चांदी की दो कड़ियां निकाल ली थीं। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर दोनों चांदी की कड़ियां भी बरामद कर लीं और जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में आरोप-पत्र प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 24 गवाहों के बयान और 48 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी तरूणाबाई को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास तथा 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।