राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर में भारतीय सेना की कॉम्बैट एविएशन क्षमता से जुड़ा एक अहम अभ्यास किया गया। आर्मी एविएशन कॉर्प्स की वैलिएंट विंग्स स्क्वाड्रन ने AH-64E अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर की गन सिस्टम की क्षमता को परखा। अभ्यास के दौरान अपाचे हेलिकॉप्टर ने अपनी इन-बिल्ट 30 एमएम चेन गन से हवा में उड़ रहे मानवरहित ड्रोन को निशाना बनाया और उसे उड़ान के दौरान ही नष्ट कर दिया।
यह अभ्यास ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब आधुनिक युद्ध क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। छोटे और अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ने वाले मानवरहित प्लेटफॉर्म निगरानी से लेकर हमले तक के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी लड़ाकू हेलिकॉप्टर की अपनी गन प्रणाली के जरिए हवाई लक्ष्य को तुरंत पहचानकर उस पर कार्रवाई करने की क्षमता को परखना सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
हवा में उड़ते लक्ष्य को बनाया निशाना
फायरिंग के बाद ड्रोन हवा में ही नष्ट हो गया। इस पूरी कार्रवाई में अपाचे की अपनी गन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। खास बात यह रही कि लक्ष्य को नष्ट करने के लिए किसी नई मिसाइल या अलग से लगाई गई बाहरी हथियार प्रणाली का इस्तेमाल नहीं किया गया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षण?
आधुनिक युद्ध में ड्रोन एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। निगरानी, टारगेट की पहचान, संचार और कई मामलों में हमले के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनकी छोटी बनावट, तेजी से दिशा बदलने की क्षमता और अपेक्षाकृत कम लागत के कारण इन्हें पारंपरिक हवाई लक्ष्यों से अलग चुनौती माना जाता है।
ऐसे परिदृश्य में युद्धक हेलिकॉप्टर के पास मौजूद गन सिस्टम का प्रभावी इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है। जैसलमेर में किया गया यह अभ्यास इसी क्षमता को व्यावहारिक परिस्थितियों में परखने की दिशा में देखा जा रहा है।
अभ्यास के दौरान यह जांचने पर जोर रहा कि अपाचे हेलिकॉप्टर हवा में मौजूद मानवरहित लक्ष्य को कितनी तेजी से पहचानकर उस पर कार्रवाई कर सकता है। साथ ही पायलट और हथियार प्रणाली के बीच समन्वय तथा लक्ष्य पर सटीक फायरिंग की क्षमता को भी परखा गया।
अपाचे की भूमिका सिर्फ जमीनी हमले तक सीमित नहीं
जैसलमेर क्यों बना अभ्यास का क्षेत्र?
जैसलमेर का रेगिस्तानी इलाका भारतीय सेना के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिमी सीमा से लगे इस क्षेत्र में सेना नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण और युद्धाभ्यास करती है। यहां का रेगिस्तानी भूभाग सैन्य प्लेटफॉर्म की क्षमता, पायलटों की प्रतिक्रिया और हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन को वास्तविक परिस्थितियों के करीब परखने का अवसर देता है।
इसी वजह से जैसलमेर में होने वाले ऐसे अभ्यासों का महत्व केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहता। इनसे सेना को अलग-अलग परिस्थितियों में अपने प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियों की वास्तविक क्षमता का आकलन करने में मदद मिलती है।
ड्रोन चुनौती के बीच बढ़ी ऐसी क्षमताओं की जरूरत
दुनिया भर में युद्ध के बदलते स्वरूप के साथ ड्रोन का महत्व लगातार बढ़ा है। पारंपरिक लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों के साथ अब छोटे मानवरहित हवाई प्लेटफॉर्म भी युद्ध क्षेत्र का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में किसी भी सैन्य बल के लिए ड्रोन की पहचान और उससे निपटने की क्षमता महत्वपूर्ण होती जा रही है।
जैसलमेर में हुआ यह अभ्यास इसी बदलती युद्ध रणनीति के संदर्भ में अहम है। यहां किसी नई मिसाइल प्रणाली की जांच के बजाय पहले से उपलब्ध अपाचे के गन सिस्टम को हवाई लक्ष्य के खिलाफ इस्तेमाल किया गया। इससे यह परखा गया कि जरूरत पड़ने पर हेलिकॉप्टर अपनी मौजूदा हथियार क्षमता का इस्तेमाल करते हुए ड्रोन जैसे लक्ष्य के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई कर सकता है।
वैलिएंट विंग्स स्क्वाड्रन की भूमिका
वैलिएंट विंग्स भारतीय सेना के आर्मी एविएशन कॉर्प्स की अपाचे स्क्वाड्रन है। यह सेना की कॉम्बैट एविएशन क्षमता का हिस्सा है। अपाचे जैसे अटैक हेलिकॉप्टरों को सेना के जमीनी अभियानों को हवाई सहायता देने, महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर कार्रवाई करने और युद्ध क्षेत्र में आवश्यक फायरपावर उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
जैसलमेर में किया गया अभ्यास इस बात का उदाहरण है कि सेना अपने मौजूदा प्लेटफॉर्म की क्षमताओं को अलग-अलग परिस्थितियों में लगातार परख रही है। ड्रोन को हवा में निशाना बनाना इस प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
अभ्यास ने दिया महत्वपूर्ण परिचालन अनुभव
इस परीक्षण से पायलटों को मानवरहित हवाई लक्ष्य के खिलाफ हेलिकॉप्टर की गन प्रणाली के इस्तेमाल का व्यावहारिक अनुभव मिला। साथ ही लक्ष्य की पहचान, निशाना साधने और निर्धारित हथियार प्रणाली से सटीक फायरिंग की प्रक्रिया को भी परखा गया। हालांकि यह अभ्यास किसी नई मिसाइल या बाहरी हथियार प्रणाली के परीक्षण के लिए नहीं था, लेकिन इसका महत्व कम नहीं है। यह सेना की उस तैयारी को दर्शाता है, जिसमें मौजूदा हथियार प्रणालियों का जरूरत के मुताबिक अलग-अलग प्रकार के लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित की जा रही है।
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जैसलमेर के आसमान में हुआ यह परीक्षण इस बात का संकेत है कि बदलते युद्ध क्षेत्र में भारतीय सेना अपने लड़ाकू हेलिकॉप्टरों की क्षमताओं को लगातार नए परिचालन परिदृश्यों के अनुरूप परख रही है। हवा में उड़ते ड्रोन को 30 एमएम चेन गन से नष्ट करने की कार्रवाई ने अपाचे की त्वरित प्रतिक्रिया और सटीक फायरिंग क्षमता को अभ्यास के दौरान प्रदर्शित किया। मुख्य सुधार भाषा और व्याकरण तक सीमित रखे गए हैं; मूल जानकारी और तथ्य नहीं बदले गए हैं।