युवा दिवस के मौके पर बात करते हुए कोटा की मूल निवासी सुगंध भार्गव ने बताया कि उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई करके मुंबई में टाइम्स ऑफ इंडिया में नौकरी की। इसी दौरान कोविड के समय जब सभी लोग इस बीमारी से बचाव के लिए अलग-अलग नुस्खे आजमा रहे थे, सुगंध ने योग की तरफ कदम बढ़ाए। अपने अनुभव साझा करते हुए सुगंध कहती हैं कि योग के दौरान मुझे अपनी एनर्जी में काफी बदलाव महसूस हुआ। फिर मैं इसी दौरान 21 दिन की अपनी सोलो ट्रिप पर केदारनाथ गई, जिसने मेरी जिंदगी बदल दी। मुझे लगा मेरी एनर्जी शिफ्ट हो गई है और यहीं से मैं अध्यात्म और योग की तरफ चली गई।
अध्यात्म की तरफ अपने इस अनुभव के बाद उन्होंने बाकायदा हरिद्वार के पतंजलि युनिवर्सिटी से योग के थ्री लेवल का सर्टिफिकेट कोर्स किया। उसके बाद द योगा इंस्टीट्यूट, मुंबई से 6 लेवल योगा पूरा किया। विपश्यना साधक सुगंध इस समय कोयंबटूर में सदगुरु के आश्रम में रहकर अपनी साधनाओं को और मजबूत कर रही हैं।
सुगंध स्पीरिच्युअल कोच के रूप में विभिन्न संस्थाओं में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। अब तक वे करीब आठ हजार लोगों को योग और स्पीरिच्युअल स्पीच के माध्यम से प्रशिक्षित कर चुकी हैं और कई मरीजों को बीमारी से बाहर ला चुकी हैं।
भविष्य के बारे में बताते हुए सुगंध कहती हैं कि वे जीवन में इसी क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए काम करना चाहती हैं। साथ ही नाद योग, जो कि योग की ही एक विधा है, के बारे में लोगों को अवगत कराना चाहती हैं।