जयपुर में कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश स्तरीय संगठनात्मक कार्यशाला में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कार्यकर्ताओं की भूमिका को संगठन की आत्मा बताते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ता के बिना प्राणविहीन है। उन्होंने जोर दिया कि गांव स्तर पर बूथ अध्यक्ष, मंडल में मंडल अध्यक्ष और जिलों में जिलाध्यक्ष संगठन के एंबेसेडर हैं और उनके हस्ताक्षर से जनता के काम होने चाहिए।
अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर
वसुंधरा राजे ने कहा कि कार्यकर्ता की एक घंटी पर अधिकारी फोन उठाएं और काम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके अनुसार कार्यकर्ता की आवाज प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की आवाज के समान है और इसे मजबूती से सुना जाना चाहिए।
भाजपा के विस्तार को कार्यकर्ताओं की तपस्या बताया
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय था जब देश के हर कोने में कांग्रेस का प्रभाव था, जबकि आज हर दिशा में भाजपा दिखाई देती है। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं की तपस्या का परिणाम बताया, जिन्होंने भूख-प्यास की परवाह किए बिना पार्टी के लिए निरंतर काम किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत के विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दो वर्ष पूरे होने पर बधाई दी।
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कविता के जरिए दिया सेवा का संदेश
अपने संबोधन के दौरान वसुंधरा राजे ने एक शेर पढ़ते हुए समाज सेवा और संवेदनशीलता का संदेश दिया, जिसमें पीड़ितों के आंसू पोंछने और जरूरतमंदों का सहारा बनने की बात कही गई। उन्होंने शेर पढ़ा-
किसी रोते हुए चेहरे से आंसू पोंछ तो सही,
किसी बेसहारा की लाठी बन तो सही।
कहीं मत कर तलाश, इसी जमीं पर है ईश्वर,
किसी के जख्म पर मरहम लगा तो सही।
एक दिवसीय इस संगठनात्मक कार्यशाला में राष्ट्रीय संगठन मंत्री बी.एल. संतोष, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ सहित 44 जिलों के जिलाध्यक्ष, जिला प्रभारी, सह प्रभारी और प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य शामिल हुए। कुल लगभग 180 लोगों ने कार्यशाला में सहभागिता की।
डोटासरा की टिप्पणी पर प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
कार्यशाला के बाद प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बताया कि पांच सत्रों में भाजपा के सिद्धांतों और मूल्यों पर चर्चा की गई तथा उपस्थित पदाधिकारियों को संगठनात्मक दृष्टि से मार्गदर्शन दिया गया। मदन राठौड़ ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें किसी प्रकार के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि डोटासरा को पहले अपने संगठन की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। डोटासरा ने कार्यशाला में कुछ नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर संगठन पर सवाल उठाए थे और प्रदेश नेतृत्व पर टिप्पणी की थी।