Rajasthan Crop Damage: पिछले 24 घंटों में राजस्थान के कई हिस्सों में आंधी-तूफान के साथ हुई बेमौसम बारिश ने बढ़ती गर्मी से राहत तो दी, लेकिन खड़ी और कटी हुई रबी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचाया। हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने नुकसान के आकलन और राहत प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि राजस्व विभाग को फसल नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि ओलावृष्टि या बेमौसम बारिश से 33% से अधिक नुकसान होने पर किसानों को SDRF के नियमों के तहत मुआवजा दिया जाएगा।
सरकार ने राहत देते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान को भी कवर किया है। कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल यदि 14 दिनों के भीतर बारिश या प्राकृतिक आपदा से खराब होती है, तो किसान क्लेम के पात्र होंगे। इसके लिए किसानों को 72 घंटे के भीतर एग्रीकल्चर रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन 14447, बीमा कंपनी, बैंक या कृषि कार्यालय में सूचना देनी होगी। अधिकारियों के अनुसार शिकायत मिलते ही बीमा कंपनियों को तुरंत फील्ड सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समय पर क्लेम का निपटारा हो सके। साथ ही विभागीय टीमें प्रभावित क्षेत्रों में जाकर किसानों की मदद कर रही हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज हुई, जिसमें बीकानेर के नोखा में सर्वाधिक 25 मिमी बारिश हुई। अधिकांश क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तक नीचे रहा। सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर उत्तर-पूर्वी राजस्थान, खासकर भरतपुर और जयपुर संभाग में बना रह सकता है, जहां हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें जारी रहने की संभावना है।
मौसम विभाग ने यह भी कहा कि 21-22 मार्च को पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में एक कमजोर वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि अगले 4-5 दिनों में अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में 2-3 डिग्री की बढ़ोतरी होगी।
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बेमौसम बारिश का सबसे ज्यादा असर पूर्वी राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर, करौली, डीग और अलवर जिलों में देखने को मिला, जहां पककर तैयार सरसों और गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ। भरतपुर के अमोली गांव के किसान हिमांशु सिंह ने कहा कि कटाई के समय हुई बारिश ने उनकी फसल बर्बाद कर दी, जिससे आजीविका पर संकट आ गया है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही नुकसान का सही आंकलन हो सकेगा। किसानों को 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनियों को सूचना देने की सलाह दी गई है। भरतपुर में कई गेहूं के खेतों में पानी भर गया, जबकि शहर के कुछ इलाकों में जलभराव के चलते लोगों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष राजाराम सिसिनी ने सरकार से जल्द सर्वे और मुआवजे की मांग की है।
पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, बालोतरा, जालौर और जैसलमेर में भी तेज हवाओं और बारिश से जीरा, इसबगोल, अरंडी और सरसों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई जगह खेतों में पड़ी कटी फसल भी भीग गई, जिससे नुकसान बढ़ गया।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार इसबगोल की फसल को 80% तक और जीरा को करीब 40% तक नुकसान हुआ है। बाड़मेर के किसान प्रेम सिंह सोढ़ा ने कहा कि उनकी फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद हो गई है। वहीं बालोतरा के किसान अमराराम ने कहा कि कर्ज लेकर बोई गई फसल के नुकसान से किसान टूट गए हैं और सरकार से तुरंत राहत की मांग की है।
प्रभावित जिलों के किसानों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मुआवजा, कर्ज में राहत और बिजली बिल में छूट की मांग की है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सरकार से जल्द गिरदावरी कराकर मुआवजा जारी करने की मांग की है। बाड़मेर के प्रभारी मंत्री जोराराम कुमावत ने अधिकारियों को नुकसान का विस्तृत सर्वे करने के निर्देश दिए हैं, हालांकि प्रशासन का कहना है कि गिरदावरी के औपचारिक आदेश अभी तक जारी नहीं हुए हैं।