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यूजीसी रोलबैक पर बढ़ी नाराजगी: किरण शेखावत बोलीं- मांग नहीं मानी तो भाजपा के खिलाफ मतदान का विकल्प

Thu, 27 Aug 2026 09:21 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान में यूजीसी रोलबैक की मांग के बीच स्वर्ण समाज ने भाजपा पर टिकट वितरण में भी अनदेखी का आरोप लगाया है। महिला नेत्री ने कहा कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है।
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स्वर्ण समाज की नेत्री किरण शेखावत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान में पंचायती राज और निकाय चुनावों का माहौल गर्माने के साथ ही यूजीसी रोलबैक की मांग भी राजनीतिक रंग लेती जा रही है। इस बीच स्वर्ण समाज की महिला नेत्री किरण शेखावत ने भाजपा पर टिकट वितरण में समाज की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा, जबकि नए चेहरों को टिकट देने की तैयारी की जा रही है।

किरण शेखावत ने कहा कि यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर समाज की नाराजगी अब चुनावी फैसलों में भी दिखाई दे सकती है। उनका दावा है कि यदि भाजपा ने यूजीसी रोलबैक के मुद्दे और समाज की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो समाज के लोग भाजपा के खिलाफ मतदान का विकल्प अपना सकते हैं। उन्होंने कहा कि यूजीसी रोलबैक का समर्थन करने वाले उम्मीदवार निर्दलीय होने पर भी उनके समर्थन पर विचार किया जा सकता है।

टिकट वितरण को लेकर भाजपा पर निशाना

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बातचीत के दौरान भाजपा की टिकट वितरण नीति को लेकर किरण शेखावत ने नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि 40 वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को भी टिकट से दूर रखा जा रहा है, जबकि नए लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि भाजपा कार्यकर्ताओं को टिकट देने की बात करती है और पदाधिकारियों को टिकट नहीं देने का दावा करती है तो जमीन पर टिकट के दावेदारों की तस्वीर अलग क्यों दिखाई दे रही है।

उन्होंने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि पार्टी को सभी सीटों पर आसान जीत का अनुमान नहीं लगाना चाहिए। स्वर्ण समाज की नाराजगी को नजरअंदाज करने का असर चुनावी नतीजों में दिखाई दे सकता है। कई सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन देने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है।

करणी सेना की कार्यशैली और नेतृत्व पर उठाए सवाल
यूजीसी रोलबैक आंदोलन को लेकर करणी सेना की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। किरण शेखावत ने कहा कि समाज में कई संगठन और अलग-अलग नेतृत्व सामने आने से आंदोलन की एकजुटता प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, एक समय समाज किसी मजबूत नेतृत्व के पीछे बड़ी संख्या में एकजुट हो जाता था, लेकिन अब कई समानांतर चेहरे और संगठन होने के कारण आंदोलन बिखरा हुआ नजर आता है।

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महिपाल सिंह मकराना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के लिए पूरे आंदोलन की जिम्मेदारी संभालना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि यदि अलग-अलग करणी सेना और सामाजिक संगठन एकजुट होकर एक मंच पर खड़े हों तो सरकार पर अधिक प्रभावी दबाव बनाया जा सकता है।

उन्होंने सोशल मीडिया आधारित बयानबाजी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि केवल लाइव आकर सरकार के खिलाफ बयान देने से आंदोलन मजबूत नहीं होता। इसके लिए जमीन पर मजबूत संगठन, ठोस रणनीति और लगातार जनसमर्थन जुटाने की जरूरत है।

CJP की भूमिका का भी किया जिक्र
बातचीत में CJP से जुड़े युवाओं और उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया गया। किरण शेखावत ने कहा कि आंदोलन में युवाओं ने सक्रियता दिखाई और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़े घटनाक्रम में उनकी भूमिका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। हालांकि, उनका दावा है कि इस्तीफे की मांग सबसे पहले स्वर्ण समाज की ओर से उठी थी और बाद में अन्य समूहों ने इसे आगे बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि किसी आंदोलन की सफलता का पूरा श्रेय केवल एक संगठन को देना उचित नहीं है। अलग-अलग सामाजिक समूहों और युवाओं के प्रयासों को स्वीकार करते हुए व्यापक एकजुटता बनाने की जरूरत है। उन्होंने CJP की सक्रियता को आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, साथ ही पूरे स्वर्ण समाज को साझा नेतृत्व के तहत संगठित करने पर जोर दिया।

शिक्षा और नेतृत्व निर्माण पर जोर
किरण शेखावत ने समाज के भविष्य को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज को केवल तलवार, संघर्ष और आक्रामक आंदोलन की भाषा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। युवाओं को शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और राजनीतिक नेतृत्व के लिए तैयार करना जरूरी है।

उनका कहना था कि समाज के पास ऐतिहासिक गौरव की लंबी विरासत है, लेकिन वर्तमान दौर में वास्तविक मजबूती शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता से आएगी। उन्होंने समाज के नेताओं से युवाओं को पढ़ाई और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की अपील की।

कुल मिलाकर, निकाय और पंचायती राज चुनावों से पहले यूजीसी रोलबैक का मुद्दा भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। टिकट वितरण में स्वर्ण समाज की कथित अनदेखी, करणी सेना के नेतृत्व और एकजुटता पर उठते सवाल तथा CJP की भूमिका ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।

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