राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने शुक्रवार को सरकार पर सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। जूली ने कहा कि प्रदेश की जनता कई समस्याओं से परेशान है, लेकिन सरकार उन मुद्दों पर चर्चा कराने के बजाय ध्यान भटकाने का काम कर रही है।
जूली ने विधानसभा में प्रवेश को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस गेट पर उन्हें गुरुवार को रोका गया था, शुक्रवार को उसी गेट से उन्हें विधानसभा में प्रवेश दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कल ऐसा कौन-सा नियम था, जिसके तहत उन्हें रोका गया था। जूली ने आरोप लगाया कि सरकार इस सवाल का जवाब नहीं दे रही है और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।
'जनता के सवाल कहां उठेंगे'
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पूरे प्रदेश में जनता के कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जिन पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए। लेकिन सरकार मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान केवल अनुदान मांगें पारित कराने पर है। बहुमत के दम पर अनुदान मांगें पारित हो जाएंगी, लेकिन जनता के सवाल विधानसभा में कहां उठेंगे, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
जूली ने वंदे मातरम् को लेकर चल रही चर्चा पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए वंदे मातरम् का मुद्दा लेकर आई है। जूली ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से वंदे मातरम् गाती रही है और देश के स्वतंत्रता आंदोलन में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
स्कूल, अस्पताल और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा
जूली ने कहा कि सरकार को प्रदेश के गिरते स्कूल दिखाई नहीं दे रहे हैं। अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत, दवाइयों की कमी और आम आदमी के लिए इलाज महंगा होने जैसे मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 1.25 लाख शिक्षकों के पद खाली हैं, करीब 4,000 जर्जर स्कूल हैं और लगभग 85,000 स्कूल कक्षाओं को मरम्मत की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ये मुद्दे सरकार को दिखाई नहीं दे रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था, सड़क, ट्रैफिक जाम, सीवरेज और सफाई की समस्याओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविदाकर्मियों और कर्मचारियों की समस्याओं पर भी सदन में चर्चा होनी चाहिए।
चुनाव के नाम पर विधानसभा सत्र जल्द खत्म करने पर सवाल
जूली ने विधानसभा की कार्यवाही जल्द खत्म करने के लिए पंचायत और नगर निकाय चुनावों का हवाला दिए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चुनावों के बारे में सरकार को पहले से पता था और कोर्ट में हलफनामा भी सरकार ने ही दिया था। ऐसे में विधानसभा का सत्र 15 दिन या एक महीने पहले बुलाया जा सकता था, ताकि सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सके।
उन्होंने कहा कि पिछली बार भी विधानसभा से जल्दी निकलने के लिए पंचायत और नगर निकाय चुनावों का तर्क दिया गया था और अब फिर वही बात कही जा रही है। जूली ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि "यह सरकार विधानसभा से भाग रही है।" उन्होंने सरकार से जनता के सवालों का जवाब देने और मुद्दों पर सदन में चर्चा कराने की मांग की।