मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुरुआत से ही इस गतिरोध को खत्म करने के प्रयास किए। उन्होंने विपक्ष से संवाद कायम किया और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि सदन में सार्थक बहस हो, ताकि 2025-26 के शानदार बजट पर चर्चा हो सके और इसकी घोषणाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने निभाई पुल की भूमिका
इस गतिरोध को खत्म करने में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने भी अहम योगदान दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के बीच संवाद स्थापित कर समाधान का मार्ग प्रशस्त किया।
विपक्षी नेताओं ने भी सराहा मुख्यमंत्री का प्रयास
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की इस पहल की विपक्षी नेताओं ने भी सराहना की। सदन में अब सकारात्मक माहौल बन गया है और निलंबित विधायकों की वापसी के बाद बहस के लिए अनुकूल स्थिति तैयार हो गई है।
बजट पर होगी विस्तृत चर्चा
अब सभी की नजरें नेता प्रतिपक्ष के भाषण पर टिकी हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक स्पष्ट होगा। सरकार के बजट में युवा, महिलाएं, किसान और मजदूरों के लिए कई शानदार घोषणाएं की गई हैं, जिन पर विस्तृत चर्चा होगी। मुख्यमंत्री की इस पहल से सदन की गरिमा बनी रही और सकारात्मक राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत हुआ।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सदन के नेता को धन्यवाद दिया
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सदन के नेता एवं मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया कि उन्होंने पहल कर वार्ता की और गतिरोध को समाप्त किया। उन्होंने कहा कि अगर यह वार्ता पहले हो जाती तो विपक्ष को धरना नहीं देना पड़ता और ना ही सदन में रात्रि प्रवास करना पड़ता।
जूली ने कहा, "मैं सदन के नेता से शिकायत भी करना चाहूंगा कि यही पहल यदि तीन-चार दिन पहले हो जाती, तो यह गतिरोध पहले ही समाप्त हो जाता। हमने हमेशा कहा है – 'क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात।' सदन हम सबका है और इसे मिलकर ही चलाना चाहिए।"
इस दौरान जूली ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की टिप्पणी पर भी माफी मांगी। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी टिप्पणी से किसी को ठेस पहुंची हो तो उसके लिए खेद व्यक्त किया जाता है।
नेता प्रतिपक्ष ने विपक्ष की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा, "आओ, मिलकर कोई वजह ढूंढें एक होने की। यूं बिखरे-बिखरे ना तुम अच्छे लगते हो, ना हम। यही सदन की खूबसूरती रही है।" गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर की गई एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी के बाद विधानसभा में विवाद गहरा गया था, जिसके चलते विपक्ष ने धरना दिया और रातभर सदन में रुका। अब वार्ता के बाद गतिरोध समाप्त हो गया है।
6 निलंबित विधायकों का निलंबन निरस्त
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने टीकाराम जूली के भाषण पर जवाब देते हुए कहा कि यह बात हम अधिकतर सुनते आए हैं कि 'क्षमा बड़न को चाहिए छोटन को उत्पात'...अर्थात उत्पादन करने की भी कोई सीमा होती है। विधानसभा अध्यक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह पहली और आखरी बार है, जब माफी का मान रखा जा रहा है। भविष्य में अगर किसी प्रकार की कोई गलती होती है तो माफी नहीं चलेगी। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने यह भी कहा कि जिस प्रकार की निम्न स्तर की टिप्पणियां की गई है, उनको भी दोहराया नहीं जा सकता, साथ ही विधानसभा अध्यक्ष बोले कि आज के बाद अगर कोई भी आसान की तरफ आएगा तो उसके लिए निलंबन का प्रस्ताव लाने की जरूरत नहीं होगी वह खुद ही निलंबित माना जाएगा।
इनके निलंबन निरस्त
गोविंद सिंह डोटासरा, रामकेश मीणा, हाकम अली खान, अमीन कागजी, जाकिर हुसैन गैसावत और संजय कुमार का निलंबन रद्द किया गया।