राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए शासन की कार्यशैली को विफल करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार प्रशासन चलाने के बजाय केवल विज्ञापन और इवेंट प्रबंधन तक सीमित हो गई है, जबकि आम जनता की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
आत्मनिर्भरता के दावे पर सवाल
जूली ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों से आत्मनिर्भरता का जो दावा किया जा रहा है, उसका वास्तविक लाभ आम जनता को नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बेरोजगारी और महंगाई बढ़ी है, जिससे जनता पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के “इंतजारशास्त्र” का जिक्र करते हुए कहा कि इससे भाजपा के नेता असहज हो गए हैं और अब वे भ्रामक बयानबाजी कर रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार को जनता के सामने यह बताना चाहिए कि लंबित परियोजनाएं कब तक पूरी होंगी।
एलपीजी और पेट्रोल की कमी पर चिंता
राज्य में एलपीजी और पेट्रोल की कथित कमी को लेकर भी जूली ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि कालाबाजारी बढ़ रही है और प्रशासन इसे रोकने में असफल रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था गंभीर हालात में है, लेकिन सरकार प्रभावी कदम नहीं उठा रही।
मेडिकल कॉलेजों के मुद्दे पर भी जूली ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़, राजसमंद और जालोर में मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान रखी गई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इन परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाया।
नवगठित जिलों में स्वास्थ्य ढांचे की कमी
जूली ने नवगठित जिलों में स्वास्थ्य ढांचे की कमी पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में आम जनता की जरूरतें शामिल नहीं हैं। जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन के दावों को लेकर जूली ने कहा कि सरकार अपने लक्ष्य से काफी पीछे है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट बना हुआ है, जबकि सरकार केवल प्रचार में लगी हुई है। अंत में टीकाराम जूली ने सरकार से पूछा कि जनहित की योजनाओं को कब तक पूरा किया जाएगा और क्या शासन केवल विज्ञापनों तक ही सीमित रहेगा।