जयपुर जिले के बिचून स्थित धार्मिक और ऐतिहासिक आस्था केंद्र भैराना धाम में प्रस्तावित रीको औद्योगिक क्षेत्र के विरोध में आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। साधु-संतों, स्थानीय ग्रामीणों और देशभर से जुड़े श्रद्धालुओं द्वारा चलाया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 39वें दिन भी जारी रहा। भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद आंदोलनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। धाम की पवित्रता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों में लगातार आक्रोश बढ़ता दिखाई दिया।
संत समाज ने कहा- भैराना धाम आस्था और तप की भूमि
‘भैराना बचाओ संघर्ष समिति’ के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन में संत समाज ने साफ कहा कि भैराना धाम केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की आस्था, तप और धार्मिक परंपरा का केंद्र है। समिति का कहना है कि धाम के आसपास औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से यहां का धार्मिक वातावरण, प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित होगा।
कई दौर की वार्ता के बाद भी नहीं निकला समाधान
आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच पिछले 39 दिनों में कई बार बातचीत हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। संघर्ष समिति का आरोप है कि सरकार और रीको प्रशासन ने उनकी मुख्य मांग, यानी भैराना धाम की सीमा से रीको परियोजना को पूरी तरह हटाने को लेकर अब तक कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया है। इसी कारण आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
27 मई को होगी विशाल महापंचायत
संघर्ष समिति और संत समाज ने घोषणा की है कि 27 मई 2026 को भैराना धाम में विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें राजस्थान सहित देशभर से संत-महात्मा, सामाजिक संगठनों और सर्वसमाज के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों का दावा है कि इस महापंचायत में एक लाख से अधिक श्रद्धालु, ग्रामीण, महिलाएं और युवा शामिल हो सकते हैं।
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मांगें नहीं मानी गईं तो होगा ‘जयपुर कूच’
समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने महापंचायत से पहले उनकी मांगें नहीं मानीं तो उसी दिन “जयपुर कूच” का ऐलान किया जाएगा। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल धार्मिक स्थल बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि पर्यावरण, गौचर भूमि, पहाड़ और प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा का अभियान भी है।
हनुमान बेनीवाल ने दिया आंदोलन को समर्थन
इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान भैराना आंदोलन का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में “मजबूत कप्तान वाली सरकार” की जरूरत है और वर्तमान सरकार साधु-संतों की भावनाओं के प्रति संवेदनहीन बनी हुई है।
उपमुख्यमंत्री पर लगाए गंभीर आरोप
हनुमान बेनीवाल ने आरोप लगाया कि राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा की जमीन प्रस्तावित रीको क्षेत्र के पास होने के कारण इस परियोजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के निजी फायदे के लिए संतों की तपोभूमि और पर्यावरण के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
भाजपा सरकार और प्रशासन पर साधा निशाना
बेनीवाल ने कहा कि भाजपा सरकार गाय और संतों के नाम पर वोट मांगती है, लेकिन जब संत समाज के सम्मान और धार्मिक स्थलों की रक्षा की बात आती है, तब सरकार चुप हो जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी सरकार चला रही है और सत्ता के संरक्षण में बजरी माफिया नदियों और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अपराध, महंगाई और पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया
सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रदेश में बढ़ते अपराध, पेपर लीक, नशे के मामलों और महंगाई जैसे मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को सरकार की गलत नीतियों का परिणाम बताया। इसके साथ ही उन्होंने आरएलपी कार्यकर्ताओं से 27 मई की महापंचायत में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की। भैराना धाम आंदोलन अब केवल स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला अब धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती संभावित भारी भीड़ और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की होगी। महापंचायत को लेकर आंदोलन स्थल पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संत समाज और संघर्ष समिति लगातार लोगों से संपर्क कर आंदोलन को व्यापक समर्थन देने की अपील कर रहे हैं।