श्रीगंगानगर जिले में शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के औचक निरीक्षण के दौरान सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाहियों की गंभीर तस्वीर सामने आई है। निरीक्षण के दौरान जहां छात्रों का शैक्षणिक स्तर बेहद कमजोर पाया गया, वहीं स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की लापरवाही भी उजागर हुई। इस पूरे मामले के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
49+2 कितना होगा जवाब नहीं दे पाया आठवीं का छात्र
कक्षा सातवीं में केवल तीन छात्र
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कक्षा 1 से 8 तक के इस विद्यालय में केवल 32 छात्र नामांकित हैं, जबकि गांव की आबादी लगभग 700 के आसपास बताई गई है। मंत्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इतनी आबादी वाले गांव में इतने कम छात्र होना गंभीर चिंता का विषय है और यह शिक्षा व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। कक्षा सातवीं का निरीक्षण करने पर वहां केवल तीन छात्र उपस्थित मिले, जिससे शिक्षा की स्थिति और भी चिंताजनक नजर आई।
प्रिंसिपल और शिक्षकों की लापरवाही उजागर
बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी
निरीक्षण के दौरान दूसरे स्कूल (1 डीबीएनडी) में भी कई खामियां सामने आईं। स्कूल 2021 में माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत हो चुका है, लेकिन अब भी प्रवेश द्वार पर पुराने माध्यमिक विद्यालय का बोर्ड लगा हुआ था। इसके अलावा शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि छात्र शौचालय के बाहर ‘छात्र’ और छात्र शौचालय के बाहर ‘छात्रा’ लिखा हुआ पाया गया, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
सख्त कार्रवाई के संकेत
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सभी कमियों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो शिक्षक या प्रिंसिपल अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों का नियमित निरीक्षण होना चाहिए ताकि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।
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शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप