राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के सर्वेक्षण आंकड़ों को लेकर अखिल रावणा राजपूत सेवा संस्थान ने कड़ा विरोध जताया है। समाज का कहना है कि सर्वेक्षण में रावणा राजपूत समाज की संख्या वास्तविक जनसंख्या की तुलना में काफी कम दर्शाई गई है। इससे सर्वेक्षण की पारदर्शिता, पूर्णता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
इसी मुद्दे को लेकर रावणा राजपूत समाज की ओर से जयपुर जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम ज्ञापन सौंपा गया। इससे पहले समाज के प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचकर प्रदेश संगठन मंत्री अजय कुमार को भी ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधियों ने सरकार से सर्वेक्षण की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और सामने आई शिकायतों की जांच कराने की मांग की।
जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व की मांग
ज्ञापन के माध्यम से OBC वर्ग एवं रावणा राजपूत समाज को जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण देने की मांग रखी गई। साथ ही आयोग के सर्वेक्षण के आंकड़ों को सार्वजनिक करने, गांव, वार्ड, तहसील और जिला स्तर पर आंकड़े उपलब्ध कराने तथा सर्वेक्षण में छूटे हुए परिवारों का दोबारा सत्यापन कराने की मांग की गई।
तकनीकी गड़बड़ियों और डेटा एंट्री पर सवाल
समाज के प्रतिनिधियों का आरोप है कि सर्वेक्षण के दौरान कई परिवारों से संपर्क नहीं किया गया। विभिन्न क्षेत्रों से तकनीकी समस्याओं, अनुमान के आधार पर डेटा एंट्री और सर्वेक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ स्थानों पर मतदाता सूचियों के आधार पर अनुमान से आंकड़े अपलोड किए जाने की शिकायत भी समाज ने उठाई है।
'यह जातिगत जनगणना नहीं, सर्वेक्षण है'
प्रदेशाध्यक्ष रणजीत सिंह सोडाला ने कहा कि यह जातिगत जनगणना नहीं, बल्कि आयोग की ओर से कराया गया सर्वेक्षण है। इसलिए इसे जातिगत जनगणना के रूप में प्रचारित करना भ्रामक है। उन्होंने आयोग की पूरी रिपोर्ट, आधारभूत आंकड़े और सर्वेक्षण की पद्धति सार्वजनिक करने की मांग की।
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ज्ञापन में रावणा राजपूत समाज से जुड़े विभिन्न पदनामों को हटाकर राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों में एकरूपता के साथ “रावणा राजपूत” नाम दर्ज करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन की चेतावनी
रणजीत सिंह सोडाला ने कहा कि समाज का उद्देश्य सामाजिक न्याय, समान प्रतिनिधित्व और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सर्वेक्षण की कमियों का स्वतंत्र सत्यापन नहीं कराया गया और मांगों पर पुनर्विचार नहीं हुआ, तो समाज लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन करेगा और जरूरत पड़ने पर बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।