रितु बराला मामले में अलग एफआईआर दर्ज कराने की मांग को कांग्रेस ने नाक का सवाल बना लिया था। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में तीन दिन तक डटे रहे। लेकिन बुधवार को कांग्रेस ने बिना एफआईआर दर्ज कराए ही धरना समाप्त करने का ऐलान कर दिया। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि कांग्रेस को इस धरने से क्या हासिल हुआ? पुलिस ने दो दिन पहले प्रेस नोट जारी कर मामले में जो जवाब दिया था वही जवाब आप पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने भी दिया..फिर दो दिनों में ऐसा क्या बदल गया कि कांग्रेस जिस मुद्दे पर आर-पार का एलान कर रही थी उसे बिना एफआईआर के छोड़ दिया?
गौरतलब है कि राजस्थान में पंचायत चुनावों का कार्यक्रम भी ऐसे मोड़ पर है, जहां टिकट तय करने, नामांकन कराने और स्थानीय समीकरण साधने में एक दिन की देरी भी मुश्किल बढ़ा सकती है। 22 अक्टूबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के पहले चरण का मतदान है, 23 अक्टूबर को तीसरे चरण की 17 जिला परिषदों के लिए नामांकन की अंतिम तारीख है और 24 अक्टूबर को पहले चरण की 3,261 ग्राम पंचायतों में सरपंच-पंच के चुनाव होने हैं। इसके लिए कांग्रेस को टिकटों का एलान भी करना है। जिसके लिए अब महज कुछ घंटों का समय ही शेष बचा है। यही वजह है कि कांग्रेस जैसे-तैसे इस उलझन से बाहर निकलने के लिए बीच का रास्ता तलाश रही थी।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और खैरथल-तिजारा के चुनाव पर्यवेक्षक धर्मेंर्द राठौड़ का कहना है...हमारी मांग थी कि एफआईआर दर्ज हो। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा था कि या तो पुलिस एफआईआर दर्ज करे या फिर लिखित में जवाब दे कि एफआईआर क्यों दर्ज नहीं होगी। आज उन्होंने लिखित में दे दिया। जहां तक पंचायत चुनावों की बात है तो उस पर असर तो आ रहा था इसमें कोई संदेह नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ता स्वार्णिम चतुर्वेदी का कहना है कि जिन जिलों चुनाव हैं वहां के आज से सिंबल लेकर ऑब्जवर्स को रवाना कर दिया गया है। टिकट के लिए पहले ही बैठकें कर ली गई थी। जहां बैठकें नहीं हुई थीं वहां के पदाधिकारियों को धरने से छूट दी गई थी।
कांग्रेस विधायक व डूंगरपुर-बांसवाड़ा के पर्यवेक्षक रफीक खाना का कहना है कि मेरे पर जिस जिले का प्रभार है वहां मैंने जिला अध्यक्ष से फोन पर बात कर ली है और परसों नामांकन होने हैं। लेकिन धरने से आज पूरी न्यायपालिका, जनता और मीडिया ने यह देख लिया कि एक बेटी को न्याय देने में किस तरह बाधा पहुंचाई जा रही है। हमें चुनावों में इसका फायदा मिलेगा।
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पंचायत चुनावों के कार्यक्रम पर नजर डालें तो धरने के आसपास की तारीखें कांग्रेस के लिए काफी अहम हैं।
22 अक्टूबर: जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के पहले चरण का मतदान निर्धारित है। इस चरण में 16 जिला परिषदों के चुनाव कार्यक्रम शामिल हैं। पार्टी के लिए यह अपने चुनावी प्रदर्शन और स्थानीय संगठन की ताकत परखने का पहला अहम पड़ाव है।
23 अक्टूबर: तीसरे चरण की 17 जिला परिषदों के लिए नामांकन की अंतिम तारीख है। उम्मीदवारों को दोपहर तीन बजे तक नामांकन पत्र जमा करने हैं। इसी दिन सरपंच और वार्ड पंच के पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन, जांच, नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया भी निर्धारित है।
24 अक्टूबर: जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के तीसरे चरण के उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच होगी। इसी दिन सरपंच और वार्ड पंच के पहले चरण में 16 जिलों की 102 पंचायत समितियों की 3,261 ग्राम पंचायतों में मतदान होगा।
26 अक्टूबर: तीसरे चरण की जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य सीटों के लिए नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया पूरी होगी।
यानी कांग्रेस के लिए यह केवल एक-दो दिनों का राजनीतिक घटनाक्रम नहीं है। एक तरफ तीसरे चरण के उम्मीदवारों के नामांकन और उनकी जांच की प्रक्रिया है, दूसरी तरफ हजारों ग्राम पंचायतों में मतदान की तैयारी है।
दूसरे चरण में भी कम नहीं है चुनावी दबाव
पंच-सरपंच चुनावों का दूसरा चरण 30 अक्टूबर को होगा। इस चरण में 22 जिलों की 122 पंचायत समितियों की 3,589 ग्राम पंचायतों में मतदान निर्धारित है। इसके बाद तीसरे चरण में पांच नवंबर को 27 जिलों की 115 पंचायत समितियों की 3,704 ग्राम पंचायतों और चौथे चरण में 16 नवंबर को 25 जिलों की 115 पंचायत समितियों की 3,726 ग्राम पंचायतों में मतदान होना है।
इस तरह चार चरणों में कुल
14,280 ग्राम पंचायतों में मतदान का कार्यक्रम दिया गया है। यह संख्या आपके उपलब्ध चरणवार आंकड़ों का जोड़ है। जिला परिषद सदस्यों के चुनाव चार चरणों में होंगे। पहले चरण में 16, दूसरे में सात, तीसरे में 17 और चौथे में एक जिला परिषद शामिल हैं।
जिला पर्यवेक्षक धरने में अटके
कांग्रेस ने पंचायत चुनावों के लिए जिला पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। तय चुनाव कार्यक्रम के अनुसार इन पर्यवेक्षकों को इस वक्त अपने प्रभार वाले जिलों में होना था लेकिन इनमें से बहुत से पर्यवेक्षक कांग्रेस के एलान के बाद धरना स्थल पर पहुंच गए। ऐसे में जिलों में चुनावी तैयारी प्रभावित हो रही थी।
ये पर्यवेक्षक धरने में थे :
रफीक खान: (पर्यवेक्षक- डूंगरपुर और बांसवाड़ा)
डॉ. कृष्णा पूनिया: ( पर्यवेक्षक- नागौर और डीडवाना-कुचामन)
सुखराम विश्नोई : (पर्यवेक्षक- अजमेर)
वैभव गहलोत: (पर्यवेक्षक- अलवर)
अमीन कागजी : (पर्यवेक्षक- दौसा)
शकुंतला रावत: (पर्यवेक्षक- करौली)
प्रताप सिंह खाचरियावास : (पर्यवेक्षक- बारां)
सारिका चौधरी: (पर्यवेक्षक-चूरू)
धर्मेंद्र राठौड़: (पर्यवेक्षक- खैरथल-तिजारा)
सुमित भगासरा: (पर्यवेक्षक-प्रतापगढ़)
BJP के हमले से कांग्रेस पर दोहरा दबाव
धरने को लेकर भाजपा कांग्रेस पर निशाना साध रही है। कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने इसे राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि दिल्ली में मामला दर्ज है और जांच चल रही है।
धरने पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता न्याय की मांग से ज्यादा राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में प्रदर्शन कर रहे हैं।